
पवन सिंह भाजपा में लौटे, उपेंद्र कुशवाहा से सुलह; विनोद तावड़े शाहाबाद में खेल गए चुनावी गेम
भोजपुरी स्टार पवन सिंह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में लौट गए हैं। नई दिल्ली में मंगलवार को उपेंद्र कुशवाहा से मीटिंग के बाद विनोद तावड़े ने यह ऐलान किया। कुशवाहा और पवन सिंह के साथ आने से शाहाबाद क्षेत्र में चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले भोजपुरी स्टार पवन सिंह की भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में वापसी हो गई है। पवन सिंह ने मंगलवार को राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान भाजपा के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े और पार्टी नेता ऋतुराज सिन्हा भी मौजूद रहे। मीटिंग के बाद तावड़े ने कहा कि पवन सिंह भाजपा कार्यकर्ता के रूप में काम करते हुए एनडीए को मजबूत करेंगे।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले दिल्ली में हुई इस मीटिंग से पटना तक का सियासी पारा गर्मा गया है। पवन सिंह के भाजपा के टिकट पर आरा या अन्य किसी सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा भी चल रही है। पवन और कुशवाहा के बीच सुलह होने के बाद एनडीए को शाहाबाद क्षेत्र में फायदा होने के भी आसार नजर आ रहे हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं बिहार प्रभारी विनोद तावड़े ने मंगलवार सुबह नई दिल्ली में मीडिया से बताचीत में कहा, “पवन सिंह बीजेपी में हैं और बीजेपी में ही रहेंगे। उपेंद्र कुशवाहा ने उन्हें आशीर्वाद दिया है। आगामी बिहार चुनाव में पवन सिंह भाजपा कार्यकर्ता के रूप में एनडीए के लिए सक्रियता से काम करेंगे।”
पवन सिंह मंगलवार सुबह दिल्ली में कुशवाहा के सरकारी आवास पर उनसे मुलाकात करने पहुंचे। उन्होंने पैर छूकर कुशवाहा का आशीर्वाद भी लिया। कहा जा रहा है कि यह बैठक भाजपा के शीर्ष नेताओं के कहने पर ही हुई।
काराकाट लोकसभा चुनाव में पवन सिंह और कुशवाहा के बिगड़े थे संबंध
पिछले साल लोकसभा चुनाव में भाजपा ने भोजपुरी स्टार पवन सिंह को पश्चिम बंगाल की आसनसोल विधानसभा सीट से टिकट दिया था। मगर बाद में वे बागी होकर बिहार की काराकाट सीट से निर्दलीय लड़ गए थे। काराकाट से एनडीए ने आरएलएम चीफ उपेंद्र कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया था।
पवन सिंह के निर्दलीय उतरने से एनडीए के वोट छिटक गए और महागठबंधन के प्रत्याशी राजाराम सिंह कुशवाहा काराकाट जीत गए। पवन दूसरे नंबर पर रहे, जबकि कुशवाहा को करारी हार का सामना करना पड़ा।
पवन सिंह फैक्टर से मगध और शाहाबाद में एनडीए को नुकसान
लोकसभा चुनाव में पवन सिंह के काराकाट से निर्दलीय लोकसभा चुनाव लड़ने से एनडीए कैंडिडेट उपेंद्र कुशवाहा का चुनाव फंस गया दिखने लगा था। शाहाबाद और मगध इलाके में कोइरी वोटरों के बीच पवन के लड़ने से एक जातीय संदेश गया। आरा से लड़ रहे तब के केंद्रीय मंत्री आरके सिंह गठबंधन को पवन सिंह के लड़ने का नुकसान समझाते रह गए लेकिन भोजपुरी सुपरस्टार मैदान में डटे रह गए।
नतीजे आए तो एनडीए के हाथ से काराकाट ही नहीं, आस-पास की कई सीटें निकल गईं। तब से पवन सिंह के संबंध उपेंद्र कुशवाहा और आरके सिंह से बिगड़ गए थे। हाल में पवन ने आरके सिंह से भी मुलाकात की थी।
शाहाबाद में एनडीए को होगा फायदा?
दक्षिण बिहार के शाहाबाद क्षेत्र में एनडीए को पिछले चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था। लोकसभा चुनाव 2024 में भी शाहाबाद में भी महागठबंधन भारी रहा था। अब 2025 के बिहार चुनाव से पहले पवन सिंह और उपेंद्र कुशवाहा के साथ आने से समीकरण बदल सकते हैं।
पवन सिंह की भाजपा में वापसी से एनडीए को लोकसभा चुनाव के दौरान बिखरे राजपूत वोटों को वापस साथ लाने में सहूलियत होगी। इसका फायदा ऐसी सीटों पर भी होगा जहां कुशवाहा वोट निर्णायक भूमिका में रहते हैं।
भाजपा का महल बनाने का सपना अधूरा रहेगा- आरजेडी
उपेंद्र कुशवाहा और पवन सिंह की मुलाकात पर राजद के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद कहा है कि तिनके-तिनके को जोड़कर भाजपा महल बनाना चाहती है, लेकिन उनका सपना-सपना रह जाएगा। क्योंकि, बिहार की जनता का विश्वास तेजस्वी प्रसाद यादव के प्रति है।





