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27 मार्च, 2020|2:22|IST

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कोरोना के फेर में फंसी दुनिया की पहली हॉस्पीटल ट्रेन

file photo

दुनिया का पहला रेलवे ट्रैक पर दौड़ता अस्पताल फिलहाल कोरोना वायरस से प्रभावित है। यह अस्पताल आया तो बिहार के गरीब ग्रामीणों की सेहत की फिक्र करने के लिए था मगर खुद ही फंस गया। हम बात कर रहे हैं देश की पहली हॉस्पीटल ट्रेन जीवनरेखा एक्सप्रेस की। यह ट्रेन बीते 15 दिन से अधिक समय से सीतामढ़ी जिले के छोटे से स्टेशन बाजपट्टी पर खड़ी है। पहले प्रशासन ने 18 मार्च से लगने वाले शिविर की अनुमति रद्द की। फिर देश में ट्रेनों का परिचालन बंद हो गया।

दुनिया की पहली हॉस्पीटल ट्रेन वर्ष 1991 में मुंबई से शुरू हुई। इसे मुंबई के एक ट्रस्ट ने रेलवे की मदद से शुरू किया। तीन डिब्बों से शुरू हुई ट्रेन में अब आठ डिब्बे हैं। इसमें दो डिब्बों में ऑपरेशन थिएटर बाकी हिस्से में पैथालॉजी, वार्ड, किचन, डायनिंग हॉल आदि सुविधाएं हैं। यह ट्रेन यूं तो पहले भी कई बार बिहार के ग्रामीण अंचलों में अपनी सुविधाएं दे चुकी है। 

इस बार बारी सीतामढ़ी जिले की थी। ट्रेन 11 मार्च को यहां पहुंच गई। 18 मार्च से यहां भारत पेट्रोलियम की मदद से नि:शुल्क चिकित्सा शिविर लगना था। जो पांच अप्रैल तक चलना था। इसी बीच 14 मार्च को नोवेल कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के चलते शिविर लगाने की अनुमति निरस्त हो गई। ट्रेन पर करीब दो दर्जन लोगों का स्टाफ था। इसके अलावा शिविर के लिए दिल्ली और मुंबई से आने वाले चिकित्सकों के टिकट भी बुक हो चुके थे। सब कैंसिल कराने पड़े।

स्टाफ बोले पता नहीं कब तक फंसे रहेंगे
इस बीच ट्रेन को बाजपट्टी स्टेशन पर खड़ा करा दिया गया। तब से यह वहीं खड़ी है। कुछ स्टाफ भी लौट गया मगर चार-पांच लोग अभी ट्रेन के साथ ही हैं। इन्हीं में से एक वीरेंद्र राय ने बताया कि ट्रेन संचालन बंद होने से फंस गए हैं। ट्रैक का भी किराया देना होता है। पता नहीं अभी कब तक यहीं फंसे रहना होगा।

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  • Web Title:worlds first hospital rail Jiwanrekha Express currently affected by corona virus

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