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आपदा में महिलाओं का विशेष ख्याल रखना जरूरी : चौधरी

विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने कहा कि महिलाएं परिवार की धूरी होती हैं। इसलिए किसी भी आपदा में उनके साथ ही बच्चों का अधिक ख्याल रखा जाना चाहिए। समाज से तिरस्कृत ट्रांसजेंडर (किन्नर) को भी विशेष सुविधा दी जानी चाहिए। बाढ़ सुरक्षा सप्ताह के मौके पर बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से आयोजित आपदा प्रबंधन में लैंगिक मुद्दों पर कार्यशाला में अध्यक्ष ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में किए गए कार्यों पर राज्य सरकार की प्रशंसा की। कहा कि मानक संचालन प्रणाली (एसओपी) बनने से आपदा पीड़ितों को तत्काल राहत मिल रही है। सुझाव दिया कि आपदा को दो श्रेणियों में बांटकर काम किया जाए। अगलगी जैसी आपदा जिस पर सतकर्ता से काबू पाया जा सकता है, उसे निवारण में रखा जाए। बाढ़ जैसी आपदा जिसका निवारण नहीं हो सकता, उसे गैर निवारण की श्रेणी में रखा जाए। बाढ़ का मूल कारण गंगा सहित अन्य नदियों में गाद को बताते हुए कहा कि गाद की समुचित निकासी के अभाव में बाढ़ की समस्या तो है ही नदियां भी मर रही हैं। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व्यास जी ने कहा कि आपदा आने पर सबसे पहले व्यक्ति, फिर परिवार और समाज प्रभावित होता है। सरकारी राहत पहुंचने तक हम व्यक्ति व समाज के स्तर पर आपदा के जोखिम को कैसे कम कर सकते हैं, इस पर सोचने की जरूरत है। आपदा में महिलाओं का शोषण न हो, इसका ख्याल रखा जाना चाहिए। जिलास्तर पर बन रहे आपदा योजना में ट्रांसजेंडरों को भी शामिल किया जाएगा। पद्मश्री सुधा वर्गीज ने कोसी के कुसहा हादसा के अनुभवों को साझा करते हुए महिलाओं व बच्चों का विशेष ख्याल रखने की बात कही। कार्यशाला में सदस्य डॉ. यूके मिश्र, आयुष के महानिदेशक डॉ. सत्येंद्र, डॉ. शंकर दयाल व डॉ. मधुबाला के अलावा तकनीकी सत्र में कई गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने विचार रखे। संचालन ट्रांसजेंडर संस्था दोस्ताना सफर की रेश्मा प्रसाद ने की।

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  • Web Title:Women need special care in the disaster: Chaudhary