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जूनियर इंजीनियर की कब होगी बहाली, 28 तक बताएं

सात हजार से ज्यादा जूनियर इंजीनियर के रिक्त पदों पर कब तक बहाली होगी, इसकी जानकारी देने का आदेश पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया है। इसके लिए अदालत ने सरकार को 28 अगस्त तक का समय दिया है।

राज्य में जूनियर इंजीनियर के रिक्त पदों पर लम्बे समय से बहाली नहीं किए जाने पर कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए अगली सुनवाई पर स्थिति स्पष्ट करते हुए जवाब देने का आदेश दिया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमआर शाह व न्यायमूर्ति डॉ. रवि रंजन की खंडपीठ ने मुकेश कुमार की ओर से दायर लोकहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की। आवेदक की ओर से अदालत को बताया गया कि सूबे में विभिन्न विभागों में सात हज़ार से ज्यादा जूनियर इंजीनियरों के पद कई वर्षों से रिक्त हैं, लेकिन राज्य सरकार बहाली के लिए गंभीर नहीं है। एक ओर डिग्री और डिप्लोमा लेकर जूनियर इंजीनियर बेरोजगार घूम रहे हैं तो दूसरी ओर सूबे के विकास कार्य में इनका योगदान नगण्य है ।

सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मियों को समय पर पेंशन को नीति बने

पटना। राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों से सेवानिवृत्ति के बाद शिक्षकों व कर्मचारियों को समय पर पेंशन नहीं दिए जाने के मामले पर पटना हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई। साथ ही पेंशन समय पर मिले, इसके लिए पॉलिसी बनाने की बात कही।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमआर शाह व न्यायमूर्ति डॉ. रवि रंजन की खंडपीठ ने मामले पर शुक्रवार को सुनवाई की। कोर्ट को बताया गया कि सूबे के विभिन्न विश्वविद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों व कर्मचारियों की पेंशन का भुगतान समय पर नहीं किया जाता है, जबकि सेवानिवृत्ति के बाद इन्हें पेंशन पर आश्रित रहना पड़ता है। यहां तक कि सेवानिवृत्ति के बाद बीमारी सबसे ज्यादा परेशान करती है। अदालत ने मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 24 सितम्बर तय की।

सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति जल्द सुधारे सरकार

पटना। राजधानी के सार्वजनिक शौचालय की दुर्दशा पर पटना हाईकोर्ट ने चिंता जताई। साथ ही जल्द से जल्द सुधार करने का आदेश राज्य सरकार को दिया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एमआर शाह व न्यायमूर्ति डॉ. रवि रंजन की खंडपीठ ने मामले पर शुक्रवार को सुनवाई की।

कोर्ट को बताया गया कि पटना शहर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के लिए कई जगह पर सार्वजनिक शौचालय बनाए गए हैं, लेकिन इन शौचालयों का रखरखाव नहीं किए जाने से इनकी दुर्दशा हो रही है। अदालत ने कहा कि पटना को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। इस दिशा में निगम को ठोस कदम उठाने की जरूरत है। कोर्ट ने पटना नगर निगम को अगली सुनवाई के दौरान की गयी कार्रवाइयों का ब्योरा पेश करने का आदेश दिया है। अदालत ने मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 24 सितम्बर तय की है।

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