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भारत में धर्म का अर्थ आध्यात्मिकता है : राज्यपाल

भारत में धर्म का अर्थ आध्यात्मिकता है : राज्यपाल

संक्षेप:

भारत का सर्वोच्च आध्यात्मिकता एवं दार्शनिक आदर्श एकात्मता है। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां ने बिहार लोकभवन में प्रभाकर सिन्हा की पुस्तक का विमोचन करते हुए कहा कि एकात्मता की भावना से व्यक्ति में परमात्मा का अनुभव होता है। उन्होंने बताया कि हमारी आध्यात्मिक परंपरा में आत्मा के ज्ञान पर जोर दिया गया है।

Dec 23, 2025 06:59 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, पटना
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भारत का सर्वोच्च आध्यात्मिकता एवं दार्शनिक आदर्श एकात्मता है। भारत में धर्म का अर्थ आध्यात्मिकता है। जब व्यक्ति के अंतःकरण में एकात्मता का भाव जागृत होता है, तब उसे यह अनुभूति होती है कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर परमात्मा के रूप में वही आत्मा विद्यमान है जो उसके भीतर है। ये बातें राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां ने मंगलवार को बिहार लोकभवन के दरबार हॉल में प्रभाकर सिन्हा द्वारा लिखित पुस्तक ट्रांसेडेंटल इकोज: ए स्पिरिचुअल जर्नी ऑफ अ वॉक-इन-सोल का विमोचन करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि एकात्मता की इस अवस्था को इसी जीवन में प्राप्त किया जा सकता है। एकात्मता के भाव में रहने के कारण ही हमारे ऋषियों ने अपराधियों के लिए भी अपने दरवाजे खुले रखे और उनमें सुधार के प्रयास करते रहे।

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राज्यपाल ने कहा कि हमारा शरीर नश्वर है, पर हमारे भीतर आत्मा के रूप में विद्यमान परमात्मा अविनाशी है। हमारी आध्यात्मिक परंपरा में उसे मानने का नहीं, बल्कि जानने का आह्वान किया गया है। उसे देखने के लिए ज्ञान चक्षु की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हर व्यक्ति में कोई विशेष गुण होता है, उसी प्रकार हर राष्ट्र की अपनी विशेषता होती है। हमारे ऋषियों ने प्रारंभ से ही अपने वास्तविक स्वरूप को जानने पर जोर दिया। अपने गुरु से प्रथम मिलन के अवसर पर आदिशंकराचार्य ने अपना परिचय देते हुए अपने आप को शरीर और इससे जुड़े सभी पहचान से परे शिवस्वरूप बताया। भारत में आस्तिक और नास्तिक, दोनों ही आध्यात्मिकता को मानते हैं, भले ही वे ईश्वर को माने या नहीं। कार्यक्रम को बिहार लोक सेवा आयोग के सदस्य प्रो. अरुण भगत, श्री श्री मां आनंदमयी संघ के महासचिव श्यामल जी महाराज और पुस्तक के लेखक प्रभाकर सिन्हा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर राज्यपाल के प्रधान सचिव श्री रॉबर्ट एल. चोंग्थू सहित कई महत्वपूर्ण व्यक्ति मौजूद थे।