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बिहार में कला व शिल्प की समृद्ध विरासत : राज्यपाल

बिहार में कला व शिल्प की समृद्ध विरासत : राज्यपाल

राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि बिहार में कला एवं शिल्प की विरासत गौरवपूर्ण एवं समृद्ध रही है। पाटलिपुत्र प्राचीन महानगरों के रूप में पूरी दुनिया में विख्यात रहा है। ‘पटना कलम शैली की भी ख्याति पूरी दुनिया में रही है।

राज्यपाल एवं कुलाधिपति सत्य पाल मलिक ने कला एवं शिल्प महाविद्यालय परिसर में शुक्रवार को तीनदिनी ‘प्रथम पूर्ववर्ती विद्यार्थी सम्मेलन का उद्घाटन किया। कहा कि पटना ‘सुलेख कला का भी प्रमुख केन्द्र रहा है। बिहार की कला का इतिहास यह बताता है कि सन् 1790 में चित्रकारों का एक दल मुर्शीदाबाद से आकर तत्कालीन बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में बसा। ये चित्रकार यूरोपीय और भारतीय दोनों कला की बारीकियों को समझते थे। मुगल शैली और कंपनी शैली के समन्वय से बनी बिहार की प्रान्तीय कला शैली की शुरुआत बिहार में हुई। कालांतर में यहां ‘पटना कलम शैली विकसित हुई। बिहार की मधुबनी पेंटिंग और मिथिलांचल का भित्ति चित्रण भी विश्वविख्यात है। राज्यपाल ने कहा कि सन् 1939 में स्थापित बिहार एवं झारखंड के एकमात्र इस कला एवं शिल्प महाविद्यालय के पूर्ववर्ती छात्रों ने बिहार एवं भारत को पूरे विश्व में प्रतिष्ठा दिलायी है।

पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रासबिहारी प्रसाद सिंह ने कहा कि 70 के दशक में पटना विश्वविद्यालय में शामिल इस महाविद्यालय की कला के क्षेत्र में काफी प्रतिष्ठा है। पूर्व मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि आधुनिक बिहार की ऐतिहासिक विरासतों को प्रदर्शित करने के लिए बिहार संग्रहालय एवं पटना संग्रहालय में विशेष दीर्घाएं तैयार हो रही हैं। समीक्षक प्रयाग शुक्ल ने कहा कि यह युग छवियों का युग है और इन सभी प्रकार की छवियों को बारीकी से चित्रित करने की जिम्मेवारी कलाकारों पर है। स्वागत महाविद्यालय के प्राचार्य अजय पाण्डेय ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रतिकुलपति प्रो. डॉली सिन्हा ने किया।

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  • Web Title:The rich heritage of art and craft in Bihar: the governor