Hindi NewsBihar NewsPatna NewsSuccessful Surgery on 6-Year-Old with Gaucher Disease at AIIMS Patna
छह वर्षीय बच्चे की 3.1 किलो की तिल्ली हटा रचा इतिहास

छह वर्षीय बच्चे की 3.1 किलो की तिल्ली हटा रचा इतिहास

संक्षेप:

एम्स पटना के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग ने गौचर रोग से पीड़ित छह वर्षीय बच्चे की सफल सर्जरी कर उसकी बढ़ी हुई तिल्ली को हटा दिया। बच्चे का वजन 18 किलो था और तिल्ली का वजन 3.1 किलो था। यह सर्जरी जटिलताओं के बावजूद सफल रही और बच्चे को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

Nov 04, 2025 08:02 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, पटना
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एम्स पटना के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की टीम ने गौचर रोग से पीड़ित छह वर्षीय बच्चे की सफल सर्जरी कर बढ़े हुए तिल्ली को हटा दिया। पेट के ऊपरी बाएं हिस्से में पसिलयों के नीचे तिल्ली या प्लीहा होता है, जो शरीर का महत्वपूर्ण अंग है। बच्चे का वजन 18 किलो था और उसकी तिल्ली का वजन 3.1 किलो था। यह इस आयु वर्ग के बच्चे में अब तक की सबसे बड़ी तिल्ली मानी जा रही है। यह जटिल सर्जरी पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के डॉ. अमित कुमार और डॉ. अमित कुमार सिन्हा के नेतृत्व में की गई। सर्जरी टीम में डॉ. राशि, डॉ. दिगंबर, डॉ. गौरव और डॉ. सौरव शामिल थे, जबकि एनेस्थेसिया की जिम्मेदारी डॉ. नीरज कुमार ने संभाली।

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पीडियाट्रिशियन डॉ. प्रताप पात्रा भी इस टीम के हिस्सा रहे। डॉ. अमित कुमार ने बताया कि बच्चा लंबे समय से पेट के आकार में लगातार बढ़ोतरी और बार-बार संक्रमणों से ग्रसित था, जो गौचर रोग के कारण हुई अत्यधिक स्प्लेनोमेगली से था। यह एक दुर्लभ आनुवांशिक रोग है, जिसमें ग्लुकोसेरेब्रोसिडेज नामक एंजाइम की कमी से तिल्ली और यकृत जैसे अंगों में वसायुक्त पदार्थ असामान्य रूप से जमा हो जाता है। विशाल तिल्ली और अत्यधिक रक्तस्राव के जोखिम जैसी तकनीकी चुनौतियों के बावजूद सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की गई। मरीज नेऊरा बिहटा का रहने वाला है, इसके परिवार वाले पिछले तीन सालों से परेशान थे, कई जगह इलाज के लिए लेकर गये थे। अंतत: एम्स में परिवार वाले आये और सफल ऑपरेशन हुआ, ऑपरेशन के बाद बच्चे की स्थिति सामान्य रही और उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। कैसे होती है यह बीमारी : गौचर रोग एक अनुवांशिक बीमारी है, जिसमें शरीर में एंजाइम की कमी से वसा तिल्ली, यकृत व हड्डियों में जमा हो जाती है। इससे अंग सूज जाते हैं, कमजोरी और दर्द होता है। उपचार में एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी से राहत मिलती है। यह रोग वंशानुगत रूप से फैलता है।