Story of Bollywood actor Pankaj Tripathi - पंकज के जनम भइल त दादी बहुते खुश भइली अउर नाम रख देली ‘शुभ नारायण बाबू’ DA Image

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पंकज के जनम भइल त दादी बहुते खुश भइली अउर नाम रख देली ‘शुभ नारायण बाबू’

अपने माता पिता के साथ बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी

कुआर के महीना रहे। ठीक जिउतियां के दिन पंकज के जन्म भइल। इनकर दादी बहुते खुश भइली अउर नाम रख देली ‘शुभ नारायण बाबू’। बाकी बाद में एके सब पोंगा पंडित कहे लगलन। (‘इतना कह कर पंकज त्रिपाठी की मां हंस पड़ीं’। फिर बोलीं, ये बबुआ हमरा खाली भोजपुरिए आवे ला। कईसे पूरा बात कही हो। हम कह दे तानी, तू लिख लिहा, आपन भाषा में...। ) पंकज सबसे छोटा बेटा है। दो भाई, दो बहन में। इसके बाबू जी (पंडित बनारस तिवारी) पहले जजमानी करते थे। पंकज के भइया बिजेंद्रनाथ तिवारी इससे दस साल बड़ा है। वही इसका नाम पंकज रखा। पंकज, बचपन से ही बहुते हंसमुखिया है। अउर आबाटी (शैतानी करने में आगे) भी बहुते। पढ़ने-लिखने में इसको थोड़ा भी मन नहीं लगता था। दिनभर खेलता रहता था। रोज-रोज ओरहन (शिकायत) आता। आज इहा सांप नचाया, कल उहां सांप के पूंछ पकड़ के इसको नचाने में बड़ा मजा आता था। एक दिन सांप के चक्कर में फंस गया। ई साइकिल से आ रहा था अउर बीच रास्तें में गेहुंअन सांप घेर लिया। मगर ई हिम्मती बहुते है। टंगरी ऊपर कर लिया और गेहुंअन सांप पर साइकिल चढ़ा दिया। सांप का कमर टूट गया और इ हांफते हुए घर आया। हम पूछे का हुआ रे, कवन तुमको मारा। फिर पूरा बात बताया। इसके भइया ने जाकर देखा तो सांप तड़प रहा था। 12 साल तक पंकज खूब बदमाशी करता रहा। घर के पास नीम का पेड़ था। पंकज पेड़ पर चढ़ जाता था और जब कोई उधर से गुजरता तो अचानक पेड़ पर से कूद जाता था। खासकर शाम के समय में भूत बनके खूब डरवाता था। हम पढ़ने के लिए बोलते। तब यह कहता था, ‘माई खाली एगो रोटी दे दे, खा लेम तब पढ़ब’, फिर कहता था, तनकी आराम कर लेबे दे, फिर पढ़ब। लेकिन इ कहां पढ़ता था, आराम करने में ही सो जाता था।

पंकज त्रिपाठी, बॉलीवुड अभिनेता
पंकज का जन्म 29 सितंबर 1974 को हुआ, गोपालगंज जिले के बेलसंड के हैं निवासी 
2001 में एनएसडी में हुआ चयन, फणीश्वनाथ रेणु हैं पसंदीदा कथाकार

जो भी हूं मां-बाबूजी की बदौलत
मैं जो भी हूं, मां-बाबूजी की बदौलत हूं। मेरे विचार, भावुकता, व्यावहारिकता सबमें मां-बाबूजी हैं। बाबूजी का संघर्ष आज भी मेरी आंखों में है। रात-रात भर दो सौ रुपये के लिए जागते थे, शादी-विवाह कराते थे। उनका संघर्ष आज भी मुझे प्रेरणा देता है।

पंकज के बाबूजी इसे डॉक्टर बनाना चाहते थे...
पंकज दुलरूआ बेटा है। हम इसको आज तक नहीं मारे हैं। इसके बाबूजी भी नहीं मारे हैं। पंकज गांव से ही मैट्रिक किया, सेकेंड डिवीजन से । फिर पटना के द्वारिका कॉलेज से इंटर सेकेंड डिवीजन से पास किया। इसके बाबूजी इसको डॉक्टर बनाना चाहते थे पर किस्मत में तो कुछ और लिखा था। दो बार मेडिकल प्रवेश परीक्षा में फेल हुआ तो पटना से ही होटल मैनेजमेंट किया। फिर 1200 रुपये में होटल मौर्या में बावर्ची का काम करने लगा। इसी दौरान नाटक का चस्का लगा। फिर, कालिदास रंगालय जाने लगा। जब नाटक करने में दिक्कत होने लगी, तो नौकरी छोड़ दिया। इसकी भौजी (रीता तिवारी) इसका मनोबल बढ़ाती रहीं। एनएसडी चला गया और किस्मत बदलने लगी। मगर मेरा लाल आज भी नहीं बदला है। आज भी गांव आता है तो सुबह होते ही खेत घूमने चला जाता है। नीम के दतुअन से मुंह धोता है। घर-घर जाकर सबसे मिलता है। घर में अपने बाबूजी से खूब बातें करता है। और हमसे कहता है यहां आकर फ्रेश हो जाता हूं माई। 

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  • Web Title:Story of Bollywood actor Pankaj Tripathi

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