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3 दिसंबर, 2020|7:13|IST

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राहत की हंसी देखने लायक, कवियों की कविताई पूछिए मत...

राहत की हंसी देखने लायक, कवियों की कविताई पूछिए मत...

अभी महफिल पूरी तरह जमी नहीं थी। संचालन कर रहे दिनेश बावरा महफिल में जोश भरने की कोशिश कर रहे थे। तभी अचानक एक बच्चा जोर से चिल्लाया। फिर क्या था, कवि दिनेश बावरा भी मूड में आ गए और बोले- मैं बच्चे की मां से कहना चाहूंगा, जैसे आप घर में बच्चे के पिता को आंख दिखाती हैं, उसी तरह अभी इस बच्चे को दिखाइए...जब बच्चे का बाप सीधा हो जाता है, तो इस बच्चे की क्या औकात...फिर क्या था जोरदार ठहाका लगा और धीरे-धीरे महफिल जमने लगी।

होटल चाणक्या में एनटीपीसी पूर्वी क्षेत्र-1 मुख्यालय की ओर से आयोजित हास्य कवि सम्मेलन शनिवार शाम कुछ इसी अंदाज में आगे बढ़ा। सबसे पहले क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक एस नरेंद्र और श्री देवी नरेंद्र,राकेश प्रसाद ने दीप जलाकर सम्मेलन का शुभारंभ किया। इसके बाद हंसी की गाड़ी दौड़ने लगी। फिर क्या थी, राहत की हंसी कवियों ने कवियों की कविताई ऐसी दिखी कि पूछिए मत। अपने रंग में दिखे कविशुरुआत अनामिका अंबर ने सरस्वती वंदना से की। इसके बाद राजस्थान से आए अशोक चारण ने वीर रस की कविताएं पढ़कर एक अलग ही जोश भर दिया। ऋषियों-मुनियों की तपस्थली/ ईश्वर के वरदान की /लाखों स्वर्गों से सुंदर है/ धरती हिन्दुस्तान की...। फिर ‘तिरंगा कविता सुनाकर तालियां बटोरी। इसके बाद अनामिका अंबर ने प्रेम रस सहित कई कविताएं सुनाकर दिल जीता। अनामिका ने- कभी दरिया के भीतर भी समंदर जाग उठता है/ मिले सम्मान हीरे का तो पत्थर जाग उठता है/ मेरा ईश्वर तेरा ल्लाह , हो मालिक एक सबका/ मेहरबानी हो उसकी तो, मुक्कदर जाग उठता है...सुनाकर तालियां बटोरीं। इसके बाद दिनेश बावरा बेटी पर केंद्रित कविता सुनाकर सबका दिल जीत लिया। राहत का रंग आखिर में मंच संभाला चर्चित शायर राहत इंदौरी ने और कहा कि मुझे कोई गुरुर नहीं है कि बड़ा शायर हूं। 40-45 मुल्कों में शायरी के लिए जा चुका हूं लेकिन पटना आकर एक अलग ही खुशी मिलती है। फिर राहत इंदौरी सुनाने लगे- किसने दस्तक दी, ये दिल पर / कौन है/ आप तो अंदर हैं/ बाहर कौन है /शहर में तो बारुदों का मौसम है/ गांव चलो ये अमरुदों का मौसम है...। फिर उन्होंने सुनाया- मेरी सांसों का शमाया बहुत लगता है/ वहीं शख्स पराया बहुत लगता है...। फिर सुनाने लगे- आज हम दोनो फुरसत में हैं, चलो इश्क करें/ इश्क दोनों की जरूरत है/ इसमें नुकसान का खतरा ही नहीं रहता/ ये मुनाफे की तिजारत है/ आप हिंदू, मैं मुसलमान, ये ईसाई, वो सिख/ यार छोड़ो, ये सियासत है/ चलो इश्क करें...। इसके बाद कई शायरी सुनाकर राहत इंदौरी ने रंग जमा दी। बॉक्ससवालों से बचते रहे राहत इंदौरीजब राहत इंदौरी से मीडिया ने देश के वर्तमान हालात पर पूछा तो उन्होंने कहा कि मुझे सियासत नहीं आती, इसलिए सियासत की कोई बात नहीं कहूंगा। जब भीमा कोरेगांव व पांच लोगों की गिरफ्तारी पर पूछा गया तो राहत साहब ने कहा कि घूमा-फिराकर सारी बातें सियासत से जुड़ी है और सियासत से दूर रहना चाहता हूं,इसलिए इन सब बातों पर कुछ भी टिप्पणी नहीं करना चाहता। जब राहत इंदौरी की सरहद कविता की बात उठायी गई और पाकिस्तान में सत्ता परिवर्तन पर सवाल किया गया तो हंसते हुए उन्होंने कहा कि मैँ पाकिस्तान को भी नहीं जानता। सबमें सियासत है और सियासत के चक्कर में मैं नहीं पड़ना चाहता। कवि हूं और सिर्फ कवि ही बना रहना चाहता हूं। -

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  • Web Title:Rahat indauri in arrives in patna in a programme

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