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पटना में बेलगाम चल रहे कोचिंग संस्थान

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मुसल्लपुर हाट की एक बिल्डिंग के दूसरे तल्ले पर एक हॉल में 100 से ज्यादा बच्चे बैठे हैं, जबकि उस हॉल की क्षमता 50 से 60 होगी। एक बेंच पर चार-चार छात्र-छात्राएं। पंखा चल रहा है, लेकिन गर्मी से विद्यार्थी बेहाल हैं, क्योंकि ताजा हवा आने के  लिए पर्याप्त खिड़की नहीं है। लेकिन कोई कुछ नहीं बोल पा रहा है। एक कमरे में इतने अधिक छात्र बैठाने पर छात्र विरोध नहीं कर पा रहे हैं। 

यह हाल सिर्फ एक कोचिंग का नहीं, बल्कि विभिन्न तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करानेवाले कोचिंगों में यह दृश्य आम है। बोरिंग रोड, राजेंद्र नगर, मुसल्लहपुर, नया टोला, भिखना पहाड़ी, शाहगंज, बाजार समिति, अशोक राजपथ आदि इलाकों में यह आम दृश्य है। यहां हर बिल्डिंग में दो से चार कोचिंग चल रहे हैं। हर कोचिंग में विद्यार्थी ठूंस कर बिठाए जा रहे हैं, लेकिन इन पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है। ये कोचिंग वाले विद्यार्थियों से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए मोटी रकम लेते हैं। लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ नहीं रहता है। बिहार कोचिंग संस्थान (नियंत्रण एवं विनियमन) एक्ट 2010 बना। इसके मुताबिक एक छात्र पर एक वर्गमीटर होनी चाहिए, लेकिन शायद ही कोई कोचिंग इस शर्त को पूरा करता है। आजतक एक्ट के बिंदुओं को जमीन पर नहीं उतारा गया। प्रशासन और जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय को कोचिंगों पर नियंत्रण का जिम्मा दिया गया, लेकिन चुनिंदा कोचिंगों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर इसी तरह चल रहे हैं। 

कहीं नहीं आकस्मिक चिकित्सा सुविधा, न पार्किंग
एक्ट के मुताबिक कोचिंगों में आकस्मिक चिकित्सा सुविधा होनी चाहिए। साथ ही साईिकल/ वाहन पार्किंग भी होनी चाहिए। लेकिन मछुला टोली से लेकर भिखना पहाड़ी, बाजार समिति, अशोक राजपथ आदि स्थित किसी भी कोचिंग में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। छात्र-छात्राएं साईिकल सड़क किनारे लगाते हैं। कोचिंग वाले इलाके में यह दृश्य आम है। यही नहीं, एक्ट के मुताबिक सभी कोचिंगों में आकस्मिक चिकित्सा सुविधा होनी चाहिए, लेकिन कुछ चुनिंदा कोचिंगों को छोड़ दिया जाए तो किसी भी कोचिंग में यह सुविधा नहीं है। 

नौ साल में सिर्फ 397 रजिस्ट्रेशन
एक्ट के मुताबिक कोई भी कोचिंग बिना रजिस्टे्रशन के नहीं चलाया जा सकता है। लेकिन गली-गली में चलनेवाले किसी कोचिंग के बोर्ड पर रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं दिखता। जिला शिक्षा कार्यालय के मुताबिक अबतक 609 आवेदन आए हैं। इनमें से सिर्फ 397 का रजिस्ट्रेशन हो पाया है। 111 के आवेदन अस्वीकृत कर दिए गए, जबकि पटना जिला के सिर्फ नगर परिषद इलाके में 355 कोचिंग चल रहे हैं। जिला शिक्षा कार्यालय के पास शहरी क्षेत्र में कोचिंगों का कोई आंकड़ा नहीं है। सिर्फ महेंद्रू, गर्दनीबाग और बांकीपुर के कोचिंगों के आंकड़े मौजूद हैं। इन इलाकों में क्रमश: 80, 29 और 29 कोचिंग चल रहे हैं। शहर के कोचिंग हब में चलनेवाले कोचिंगों की कोई संख्या कार्यालय में नहीं है। वैसे अंदाजन पटना शहरी क्षेत्र में लगभग एक हजार कोचिंग चल रहे हैं। इनमें मेडिकल, जेईई, क्लैट आदि की तैयारी करानेवाले कोचिंग भी शामिल हैं। 

अभी कोई सही आंकड़ा नहीं : डीईओ
पटना में कितने कोचिंग चल रहे हैं। इस पर अभी कोई सही आंकड़ा नहीं है। जिन अधिकारियों को कोचिंग जांचना था, उनका तबादला हो गया। इसलिए जांच अधूरी रह गई। नए पदाधिकारी चुनाव कार्य में लगे हुए हैं। 

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  • Web Title:Patnas Coaching institute real story

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