
साहेबगंज के थानाध्यक्ष और अनुसंधानकर्ता पुलिस पदाधिकारी तलब
पटना हाईकोर्ट ने 28 वर्ष पुराने एक मामले में पुलिस की कार्रवाई न करने पर नाराजगी जताते हुए मुजफ्फरपुर जिले के थानाध्यक्ष और अनुसंधानकर्ता को तलब किया है। कोर्ट ने अधिकारियों को आदेश दिया कि मामले का पूरा रेकॉर्ड पेश करें। 1997 में हुए डकैती के मामले में आवेदक का नाम एफआईआर में शामिल नहीं किया गया था।
पटना हाईकोर्ट ने 28 वर्ष पुराने एक मामले में पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं किये जाने पर नाराजगी जताते हुए मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज के थानाध्यक्ष और अनुसंधानकर्ता पुलिस पदाधिकारी को तलब किया है। न्यायमूर्ति सत्यव्रत वर्मा की एकलपीठ ने उमाशंकर सिंह की ओर से दायर अर्जी पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। कोर्ट ने दोनों पुलिस अधिकारियों को पूरे रेकॉर्ड के साथ यह बताने को कहा है कि कोर्ट आदेश के बाद वारंट और कुर्की-जब्ती आदेश का तामीला क्यों नहीं हुआ। इसके पूर्व आवेदक की ओर से वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने कोर्ट को बताया कि अगर दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 और 83 के तहत प्रक्रिया का क्रियान्वयन किया गया होता तो आवेदक को इस केस की जानकारी रहती।
उनका कहना था कि यदि धारा 83 सीआरपीसी के तहत कार्यवाही की होती तो पुलिस घरेलू सामान जब्त कर लेती, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। एफआईआर में लगाए गए आरोपों से स्पष्ट है कि चौकीदार शत्रुहन राय और रमेश महतो को 9 अगस्त 1997 को गोपनीय सूचना मिली थी कि गोपाल तिवारी अपने साथियों के साथ नया टोला, दोस्तपुर में डकैती करने की साजिश रच रहा है। सूचना पर छापेमारी दल घटनास्थल पर पहुंचा। छापेमारी के दौरान राम बाबू सिंह उर्फ विजय सिंह को भरी हुई राइफल के साथ गिरफ्तार किया गया, जबकि शेष आरोपित फरार हो गए। पकड़े गए आरोपित ने आवेदक सहित अपने अन्य साथियों का नाम बताया। लेकिन, दर्ज प्राथमिकी में आवेदक का नाम शामिल होने की जानकारी नहीं थी। एफआईआर में उमा सिंह का नाम था, लेकिन पिता का नाम और पूरा पता नहीं था। एफआईआर में पुलिस स्टेशन का नाम केसरिया बताया गया, लेकिन जिले का नाम नहीं दिया गया था। आवेदक पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर थाना क्षेत्र का निवासी है। 72 वर्षीय आवेदक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और पुलिस ने 28 वर्षों में गिरफ्तार करने का कोई प्रयास नहीं किया।

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