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टेक्स्ट बुक नॉलेज से नहीं, स्थल निरीक्षण से ही गंगा का संकट सामने आएगा : नीतीश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि आज जो गंगा नदी की स्थिति है, अधिकारी व विशेषज्ञ व्यवहारिक रूप से स्थल निरीक्षण कर उसे देखें तभी समस्या के समाधान पर सोचें। टेक्सट बुक नॉलेज पर अधिकारी और विशेषज्ञ न जाएं। इंजीनियरिंग ऑर्गनाइजेशन को ओपेन माइंड से सोचना होगा।
 गंगा की अविरलता के मसले पर केंद्रीय मंत्री उमा भारती के साथ हुई बैठक में सीएम ने कहा कि इकोलॉजी, इंजीनियरिंग व गंगा नदी के प्रति लोगों की भावना को देखते हुए समाधान ढूंढना होगा। स्थल निरीक्षण कर लोगों से जानकारी लेकर ही समस्या का समाधान होगा। क्योंकि अगर अविरलता नहीं रहेगी तो गंगा निर्मल कहां से होगी। जो सिवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जा रहा है, उसका पानी वापस नदी में न गिरे, इसे देखना होगा। 20 साल पहले गंगा नदी का पानी बाल्टी में रखने पर गाद नहीं जमता था। अब यह नहाने लायक भी नहीं बचा है।
सीएम ने कहा कि चितले कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में गंगा में सिल्ट का जिक्र किया है, लेकिन उस कमेटी ने स्थल निरीक्षण नहीं किया। कमेटी की रिपोर्ट पर बिहार सरकार ने अपना मंतव्य भेज दिया है। यूपीए सरकार के साथ ही साल 2015 में भी इंटर स्टेट काउंसिल की बैठक में पीएम से मिलकर इन बातों को रखा गया है। फरक्का बराज के बनने के बाद गंगा नदी के जल का नैसर्गिक प्रवाह बाधित हुआ है। बराज के अपस्ट्रीम में गंगा के प्रवाह में जो गाद पहले जल के साथ बह जाता था, अब नदी के तल में जमा होता जा रहा है। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री से अनुरोध किया था कि 10 जून से पहले अधिकारियों व विशेषज्ञों के दल को भेजें, ताकि वे इसे देख सकें। मॉनसून की बारिश अच्छी होने की संभावना में बाढ़ को रोकना मुश्किल होगा। सोन नदी और पुनपुन की धार खत्म हो गई है। पानी का बहाव घट गया है। पानी सिल्ट के साथ निकलता था जो अब नहीं निकलता है। 
बैठक में जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा, जल संसाधन के प्रधान सचिव अरुण कुमार सिंह, परिवहन की प्रधान सचिव सुजाता चतुर्वेदी, सीएम के प्रधान सचिव चंचल कुमार, सीएम के सचिव अतीश चंद्रा व मनीष कुमार वर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

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