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नए सत्र में सोशल साइंस व मानविकी के नहीं मिलेंगे शिक्षक

राज्य के विश्वविद्यालय और कॉलेजों को नए सत्र में सोशल साइंस या मानविकी के विषय राजनीति विज्ञान, इतिहास, हिन्दी जैसे विषयों में शिक्षक नहीं मिल पाएंगे। मिलेंगे भी तो सत्र की लगभग समाप्ति पर। ऐसा इसलिए, क्योंकि अबतक बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (बीपीएससी) ने इन विषयों में योग्य अभ्यर्थियों की सूची तक जारी नहीं की है। अबतक का जो ट्रेंड रहा है, उसके अनुसार जिस विषय की सूची जारी होती है उसके लगभग एक माह बाद साक्षात्कार की प्रकिय्रा शुरू हो रही है। साक्षात्कार पूरा होने के एक माह बाद जाकर रिजल्ट प्रकाशित हो रहा है। फिर, विभाग को रिजल्ट भेजने, विभाग से विश्वविद्यालयों को चयनित अभ्यर्थियों के आंवटन और विवि में वेरीफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होने में दो से तीन माह का समय लग रहा है। ऐसे में, सोशल साइंस के विषयों में तो नए सत्र में शिक्षक मिलना मुश्किल है। इतिहास में आए हैं 10 हजार आवेदन इतिहास विषय में 10 आवेदन आए हैं। बीपीएससी में अभी इन आवेदनों की छंटनी ही शुरू हो रही है। तीन स्तरों पर जांच होगी। फिर जाकर योग्य अभ्यर्थियों की सूची प्रकाशित होगी। ऐसे में इसमें और समय लगना है। बीपीएससी के सचिव के अनुसार राजनीति शास्त्र का मामला कोर्ट में पेंडिंग हैं। मार्च तक है बीपीएससी का लक्ष्य बीपीएससी ने खुद असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली प्रक्रिया समाप्त करने का लक्ष्य मार्च तक रखा है। आयोग के सचिव के मुताबिक वे लोग मार्च तक प्रक्रिया पूरी कर लेना चाहते हैं। सितंबर 2014 में असिस्टेंट प्रोफेसर का विज्ञापन निकला था, जबकि सितंबर 2015 से साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू हुई। अबतक तीन विषयों के चयनित अभ्यर्थियों की सूची विवि को मिली है, जबकि साक्षात्कार शुरू हुए लगभग दो साल हो चुके हैं। गौरतलब है कि इस मामले में हाईकोर्ट ने भी हस्तक्षेप किया था, बावजूद चयन प्रक्रिया में तेजी नहीं आ सकी है। असंतुलित हो जाएगी वरीयता एक विज्ञापन से 3364 असिस्टेंट प्रोफेसर की बहाली हो रही है, लेकिन इसमें एक अजीब बात है। मैथिली विषय के शिक्षक लगभग एक साल पहले ज्वाइन कर लिए हैं, जबकि इतिहास या हिन्दी जैसे विषयों में शिक्षक एक साल बाद ज्वाइन करेंगे। मतलब एक ही विज्ञापन से बहाली होगी, लेकिन उनके बीच वरीयता का अंतर दो साल का हो जाएगा।

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