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दस रुपये में खरीदें चौथी सदी की मिट्टी के मुहरों की प्रतिकृति

विरासत और प्राचीन सभ्यता-संस्कृति में रुचि रखने वालों के लिए खुशखबरी है। चौथी से ग्यारहवीं शताब्दी तक दुनियाभर में उच्चशिक्षा का बड़ा केन्द्र रहे नालंदा महाविहार (विश्वविद्यालय) के मुहरों की प्रतिकृति कद्रदान अपने घर में रख पाएंगे। यह प्रतिकृति महज दस रुपये के मूल्य पर कोई भी खरीद पाएगा। 4 से 9 जून तक फ्रेजर रोड के भारतीय नृत्यकला मंदिर बहुद्देश्यीय परिसर की आर्ट गैलरी में ये मुहरें प्रदर्शित होंगी तथा यहां इनकी बिक्री भी की जाएगी। उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान ने बड़ी संख्या में नामचीन टेराकोटा कलाकारों से यह प्रतिकृति तैयार करवायी है। गौरतलब है कि नालंदा महाविहार की जब भारतीय पुरातत्व विभाग ने खुदाई कराई तो यहां दुनिया के सबसे बड़े शिक्षण संस्थान होने के प्रमाण और दस्तावेज प्राप्त हुए। इन्हीं में से एक प्राप्ति थी नालंदा विश्वविद्यालय की मुहरें। राज्य सरकार के पुरातत्व निदेशक अतुल कुमार वर्मा ने बताया कि 1922 से 84 तक चली खुदाई में ये मुहरें मिली थीं, जो अब म्यूजियम में संरक्षित हैं। उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान ने राज्य सरकार द्वारा नालंदा विश्वविद्यालय को फिर से दुनिया के बड़े ज्ञान के केन्द्र के रूप में विकसित करने की पहल के तहत मुहरों की प्रतिकृति तैयार कराई। अब ये 4 से 9 जून तक चलने वाली प्रदर्शनी के माध्यम से कद्रदानों के घर तक पहुंचेंगी। प्रदर्शनी का उद्घाटन राज्य के मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह 4 जून की अपराह्न करेंगे। प्रदर्शनी में शामिल होंगे 26 कलाकारों के आर्ट उपेन्द्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान के उप प्रशासक अशोक कुमार सिन्हा ने बताया कि टेराकोटा कलाकृतियों की प्रदर्शनी में बिहार समेत देशभर के 26 चर्चित कलाकारों की कलाएं प्रदर्शित होंगी। ईश्वर चन्द्र गुप्ता, पद्मश्री ब्रह्मदेव पंडित, अमरनाथ शर्मा, रजत घोष, अमृत प्रकाश शाह, सचीन्द्र नाथ झा, प्रतीक प्रभाकर, विमल कण्डू, श्मायल राय, लाला पंडित, अखिलचन्द्र राम, धीरज चौधरी, शंकर पंडित, रामू पंडित, रविकांत टोनी, जगदीश पंडित, पिंटू प्रसाद सरीखे कलाकारों की टेराकोटा कृतियां कलाप्रेमी के लिए उपलब्ध होंगी। मधुबनी में तैयार हुई थीं कृतियां प्रदर्शनी में शामिल की गईं सभी कृतियां 24 फरवरी से 5 मार्च तक मधुबनी में आयोजित टेराकोटा महोत्सव में तैयार हुई थीं। कलाकारों ने दस दिन यहां रहकर इन्हें बनाया था। अब राजधानी में इनकी प्रदर्शनी लग रही है। मौके पर कैटलॉग भी प्रकाशित होगा।

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