28 फरवरी तक ही मिलेगी निगम क्षेत्र में अस्थायी रैनबसेरे की सुविधा
पटना में एनआईटी मोड़ के पास नए स्थायी रैनबसेरे का निर्माण अंतिम चरण में है। अस्थायी रैनबसेरे 28 फरवरी तक संचालित रहेंगे, इसके बाद जर्मन हैंगर और स्थायी रैनबसेरे का संचालन जारी रहेगा। यहां बेघर लोगों के लिए नि:शुल्क भोजन, पेयजल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।

इसे वेब पर न डालें:: - एनआईटी मोड़ के पास नए स्थायी रैनबसेरे का निर्माण अंतिम चरण में - जर्मन हैंगर और स्थायी रैनबसेरे का संचालन सालभर होता रहेगा - फुटपाथ पर लोग नहीं सोएं इस वजह से होगा इसका संचालन पटना, मुख्य संवाददाता। निगम क्षेत्र में 28 फरवरी तक अस्थायी रैनबसेरे की सुविधा मिलेगी। इसके बाद इन्हें बंद कर दिया जाएगा। हालांकि जर्मन हैंगर और स्थायी रैनबसेरे का संचालन पहले की तरह सभी अंचलों में चलता रहेगा। ठंड शुरू होने के साथ ही निगम क्षेत्र में कुल आठ अस्थायी रैनबसेरे की व्यवस्था शुरू की गई थी। यहां नि:शुल्क भोजन, मच्छरदानी वाले बेड लगाए गए हैं।
छह स्थायी रैनबसेरे और 16 जर्मन हैंगर संचालित किए जा रहे हैं। लगभग एक लाख लोगों ने इस ठंड में शहर के 30 रैनबसेरों में शरण ली है। निगम के अधिकारियों ने बताया कि फुटपाथ पर लोग न सोएं इसके लिए जर्मन हैंगर और स्थायी रैनबसेरे का संचालन जारी रहेगा। यहां पहले की तरह सुविधाएं मिलती रहेंगी। जर्मन हैंगर में नि:शुल्क भोजन की सुविधा भी 28 फरवरी से बंद हो जाएगी। हालांकि स्थायी रैनबसेरे में न्यूनतम भुगतान पर आधारित खानपान सेवाएं मिलती रहेंगी। निगमकर्मी संभाल रहे जर्मन हैंगर का संचालन जर्मन रैनबसेरे का संचालन अब निगमकर्मियों के हाथ में दिया गया है। आरंभ में इसके रखरखाव का जिम्मा इसे निर्मित करने वाली एजेंसी के पास था। परिसर में गंदगी और अव्यवस्था की शिकायतें मिलने के बाद निगम के अधिकारियों ने इसका संचालन और रखरखाव अपने कर्मियों के जिम्मे करने का निर्णय लिया। हाल में सीसीटीवी व कैमरे से इसकी निगरानी भी बढ़ाई गई है। निगम क्षेत्र में एक नए स्थायी रैनबसेरा का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। एनआईटी मोड़ के पास इसका निर्माण कराया गया है। इस इलाके के बेसहारा लोग यहां ठहर सकेंगे। पेयजल व अन्य सुविधाओं को लेकर काम पूरा किया जा रहा है। 15 फरवरी तक इस काम को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। फरवरी के अंत तक यहां आवासन व्यवस्था बहाल हो जाएगी।
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