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जातिवाद पर चोट करते रहे कलाकार

जातिवाद पर चोट करते रहे कलाकार

जातिवाद का जहर कितना खतरनाक होता है, कैसे इंसान को इंसान नहीं समझा जाता है, कैसे समाज में भेदभाव बढ़ाया जाता है, इन सब चीजों को कलाकारों ने रोचक अंदाज में मंच पर उतारा। कालिदास रंगालय में शनिवार शाम प्रेमचंद की कहानी ‘सद्गति को मंचित किया गया। अनिल ओझा द्वारा नाट्य रूपांतरित यह कहानी उदय कुमार सिंह (उदय गांधी) के निर्देशन में मंचित हुआ।

और इसी के साथ आईएनडीआईए के दो दिवसीय नाट्योत्सव का आगाज भी हो गया। दो कहानियों का जोड़प्रेमचंद की दो कहानियां- सद्गति और ठाकुर का कुआं, दोनों को जोड़कर यह नाटक तैयार किया गया था। नाटक में यह दिखाया गया कि जातिवाद का जहर कैसे दलितों को अपने गिरफ्त में लेता है। कैसे एक पंडित जी एक दलित से बेगारी कराते हैं और आखिर में कैसे वह भूख-प्यास से मर जाता है। कैसे गांव में ठाकुर का कुआं जातिगत उत्पीड़न का कारण बनता है, इन सब चीजों को कलाकारों ने मंच पर उतारा। नाटक में रोहन श्रीवास्तव, अविनाश कुमार, सुधीर कमल, रूपांजली, उदय कुमार सिंह, अनीता कुमारी, चंद्रमणि कुमार, शुभम सिंह, सन्नी कुमार, विकास कुमार,सत्यव्रत गुप्ता, समीर कुमार, निशा भारती, विक्की कुमार, मुजम्मिल इमाम, कृष्ण कुमार, सौरभ कुमार, विशाल कुमार।

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