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राज्य में हर तीन घंटे पर हो रही भूजलस्तर की मॉनिटरिंग

राज्य सरकार के पास अब हर तीसरे घंटे के जलस्तर की रिपोर्ट होगी। वह भी सभी प्रखंडों की अलग-अलग रिपोर्ट। सरकार ने जलस्तर मापने के स्वचालित यंत्र लगाने शुरू कर दिए हैं। 434 प्रखंडों में ये यंत्र काम भी करने लगे हैं। शेष प्रखंडों के अलावा कुछ और प्रमुख जगहों पर यंत्र लगाने का कार्य जारी है।

लघु जल संसाधन विभाग में कर्मियों की कमी के कारण भूजल स्तर का अकलन कठिन काम था। एक-एक कर्मी के जिम्मे कई-कई जिले हैं। लिहाजा उनके लिए दिनभर में एक बार भी जलस्तर मापना कठिन हो जाता था। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने टेलीमीटर की व्यवस्था की है। इस यंत्र को ट्यूबवेल में लगा दिया जाता है। साथ ही यह यंत्र खुद-ब-खुद सेटेलाइट से जुड़ जाता है। यह यंत्र जलस्तर मापकर उसकी सूचना सेटेलाइट को भेजता है और हर तीसरे घंटे पर सेटेलाइट यह आंकड़ा विभाग को उपलब्ध करा देता है।

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सभी प्रखंडों में यह यंत्र लगाने का काम शुरू हो गया है। पहले इसे राज्य के कुछ कुओं में लगाया गया था। उसके बाद यंत्र जब कारगर साबित हुए तो इसका विस्तार हर प्रखंड में किया जा रहा है। इन यंत्रों से मिल रही जलस्तर की रिपोर्ट के आंकड़ों का निरीक्षण विभाग के अधिकारी बराबर करते हैं। जिन क्षेत्रों में जलस्तर तेजी से गिरता है वहां विभाग के अधिकारी उसे मेंटेन करने की कार्रवाई करते हैं। अगर किसी प्रखंड से जलस्तर तेजी से गिरने की सूचना विभाग को मिलती है तो वहां ट्यूबवेल को चलाने की अवधि कम कर दी जाती है। अगर यह समस्या लगातार बनी रही तो सरकार के स्तर पर इस पर विमर्श होता है और जलस्तर मेंटेन करने की व्यवस्था की जाती है।

  • 571 जगहों पर लगाए जाने हैं टेलीमीटर
  • 434 जगह कार्यरत है टेलीमीटर
  • 03 घंटे पर विभाग को आती है रिपोर्ट
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  • Web Title:Monitoring of ground water level every three hours in the state