
प्रवासन और विकास एक-दूसरे के पर्याय : प्रो. राम बी भगत
विकास प्रबंधन संस्थान में 'माइग्रेशन, मोबिलिटी और वेल्बीइंग' विषय पर सेमिनार हुआ। प्रो. राम बी भगत ने कहा कि विकास और माइग्रेशन एक-दूसरे से जुड़े हैं। युवा आबादी अधिक होने के कारण बिहार में प्रवासन की दर भी अधिक है। सरकार को प्रवासियों के कल्याण के लिए आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है।
विकास प्रबंधन संस्थान (डीएमआई) में सेमिनार शृंखला के तहत बुधवार को प्रवासन, गतिशीलता व कल्याण (माइग्रेशन, मोबिलिटी एंड वेल्बीइंग) विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें नई दिल्ली स्थित मानव विकास संस्थान के विजिटिंग प्रोफेसर और देश के जाने माने माइग्रेशन विषय के विशेषज्ञ प्रो. राम बी भगत ने प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि माइग्रेशन और विकास एक-दूसरे का पर्याय है। विकास और बेहतर अवसर की तलाश में जन्म स्थान को छोड़ना स्वाभाविक प्रक्रिया है। यदि आवादी को अपने जन्म स्थान पर बेहतर अवसर की संभावना दिखेगी तो वह वापस भी लौटते हैं। इसका सबसे बेहतर उदाहरण द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप के देशों में बड़ी संख्या में दूसरे देशों में रहने वाले लोगों का अपने देश लौटना कहा जा सकता है।
बिहार और देश में युवा आबादी अधिक है, इस कारण माइग्रेशन भी अधिक होगा। युवा ही ज्यादा माइग्रेट करते हैं। बुजुर्ग आबादी का प्रवासन दर काफी कम है। यह सुखद है कि बिहार सरकार ने श्रम संसाधन विभाग का नाम श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग किया है। इससे श्रमिक कल्याण से संबंधित विषयों पर नीति बनाने और उसे फलीभूत करने में सहायता मिलेगी। स्वागत सत्र में प्रो. सूर्यभूषण ने अतिथि का परिचय कराते हुए कहा कि प्रो. भगत अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (आईआईपीएस), मुंबई में प्रवासन और शहरी अध्ययन विभाग में दो दशक तक प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष रहे हैं। मौके पर निदेशक प्रो. देबीप्रसाद मिश्रा, डीन एकेडमिक प्रो. शंकर पूर्व, प्रो. गौरव मिश्रा, प्रो. श्रीधर तेलीदेवरा आदि मौजूद थे। आनलाइन माध्यम से भी कई संस्थानों के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी कार्यक्रम से जुड़े। बिहार से ज्यादा है दिल्ली का माइग्रेशन रेट देश में कई राज्यों का माइग्रेशन रेट (प्रवासन दर) बिहार से अधिक है। दिल्ली, केरल, हरियाणा, पंजाब आदि तेज विकास वाले राज्यों का माइग्रेशन रेट बिहार से अधिक है। बिहार की जनसंख्या अधिक है, इस कारण संख्या में अधिक दिखते हैं। माइग्रेशन का सही शब्द प्रवासन है। विभिन्न एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार बिहार से लगभग एक करोड़ लोग स्थायी प्रवासी हैं। वहीं, 20 से 25 लाख लोग अपनी आवश्यकतानुसार आते-जाते रहते हैं। सरकार को आवश्यकतानुसार आने-जाने प्रवासियों के लिए व्यवस्था करनी चाहिए। उनके बच्चे और परिवार के सदस्यों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य व सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बिहार सहित देश में अभी काफी काम करने की जरूरत है।

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