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STRIKE : बिहार में 7 हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर भारतीय बैंक संघ (आईबीए) एवं केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के सभी बैंकों के कर्मी व अधिकारी बुधवार को सामूहक हड़ताल पर रहे। बैंकों में ताले लटके रहे। अनुमानत: दो दिवसीय बैंक हड़ताल के पहले दिन बिहार में करीब सात हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ।

राज्य में स्थित विभिन्न बैंकों की 6905 शाखाएं बंद रहीं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित 3511 एवं शहरी क्षेत्र के 1414 व अर्द्ध शहरी क्षेत्र के 1980 बैंक शाखाओं में हड़ताल का गहरा असर हुआ। बैंक के समक्ष कर्मियों ने धरना-प्रदर्शन भी किया और केंद्र विरोधी नारेबाजी की। बैंककर्मियों ने सम्मानजनक वेतन वृद्धि करने, 11वें वेतन समझौते को लागू करने की मांग की। हड़ताल गुरुवार को भी जारी रहेगी।

नहीं हुआ चेक क्लीयरेंस, नहीं बने ड्राफ्ट : बिहार प्रोवेंसियल बैंक इम्प्लाइज एसोसिएशन के सचिव संजय तिवारी के अनुसार बैंक हड़ताल के कारण सामान्य जन, नौकरी पेशा लोगों से लेकर व्यापारिक वर्ग तक को परेशानी का सामना करना पड़ा। बैंकों में चेक का क्लीयरेंस नहीं हुआ। ड्राफ्ट नहीं बने। माह का अंतिम सप्ताह होने के कारण वेतन-पेंशन इत्यादि का भुगतान ग्राहकों के बैंक खाते में नहीं किया जा सका।

एटीएम से नहीं मिली नकदी : हड़ताल का असर बिहार में स्थित 6859 एटीएम पर भी दिखा। एटीएम से नकदी निकासी के लिए लोग भटकते रहे। हालांकि अस्पताल सहित इमरजेंसी सेवाओं के समीप स्थित एटीएम को हड़ताल से मुक्त रखा गया था। फिर भी दो-तीन घंटे के अंदर वहां नकदी खत्म हो गई। बिहार के 4 करोड़ 62 लाख 17 हजार से अधिक एटीएम धारकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

ग्रामीण व सहकारी बैंक रहे हड़ताल से दूर : सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के बैंकों में हड़ताल के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में थोड़ी राहत रही। ग्रामीण बैंकों के कर्मियों के हड़ताल में शामिल नहीं होने से वहां दिनभर बैंकिंग कारोबार हुआ। वहीं, सहकारी बैंकों में भी सामान्य कामकाज हुआ और नकदी का लेन-देन किया गया। ग्रामीण बैंक व सहकारी बैंक कर्मियों ने बैंक हड़ताल का नैतिक समर्थन दिया और बैंककर्मियों के प्रदर्शन में शामिल हुए।

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  • Web Title:Loss of seven thousand crores from bank strike