
किलकारी के बच्चों की रचनाएं स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल होंगी : मंत्री
किलकारी के बच्चों की रचनाएं अब स्कूल के पाठ्यक्रम में शामिल होंगी। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने नौ पुस्तकों का लोकार्पण करते हुए इसकी घोषणा की। मंत्री ने बच्चों की मेहनत और संवेदनशील दृष्टि की सराहना...
किलकारी के प्रतिभाशाली बच्चों की रचनाएं स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल होंगी। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने मंगलवार को विभाग के डॉ. मदनमोहन झा सभागार में किलकारी के बच्चों और निदेशक द्वारा लिखी गई नौ पुस्तकों के लोकार्पण के बाद यह घोषणा की। शिक्षा मंत्री ने बच्चों के साथ संवाद भी किया। मंत्री ने कहा कि बच्चों का बिहार की विभूतियों और महापुरुषों पर किया शोध सराहनीय है। बच्चों की रचनाएं संवेदनशील दृष्टि, मेहनत और सीखने की जिजीविषा की मिसाल हैं। किलकारी के बच्चे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रहे हैं। किलकारी के बच्चे खेल से लेकर शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर कर रहे हैं।
भारत के नामचीन कला विश्वविद्यालयों में बच्चों को उच्च शिक्षा का अवसर प्राप्त हुआ है। वर्ष 2024-25 में 50 से अधिक बच्चों की बड़ी उपलब्धियां हैं। उन्होंने कहा कि हमें देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम, साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु और रामधारी सिंह दिनकर के जीवन से सादगी, सहजता जैसे जीवन मूल्यों के गुणों को सीखना चाहिए। किलकारी निदेशक ज्योति परिहार ने स्वागत और बीईपी के एसपीडी मयंक वरवड़े ने धन्यवाद ज्ञापन किया। मौके पर शिक्षा विभाग के सचिव दिनेश कुमार और प्राथमिक शिक्षा निदेशक साहिला मौजूद थीं। इन पुस्तकों का लोकार्षण नेहा सोनी की पुस्तक रोज मिलने आऊंगा, चिंटू कुमार की पुस्तक घुमक्कड़ बाबा, श्रेया कुमारी की पुस्तक जा... जहाज छूटा, नीकू कुमारी की पुस्तक नुनु से दिनकर, किलकारी की निदेशक ज्योति परिहार की पुस्तक माफ करेंगे न, अतुल राय की पुस्तक ठक्कन मिसिर, निमिषा कुणाल की पुस्तक नटखट राजेन, अनुराग कुमार का लघुकथा संग्रह बच्चे का मन और मुनमुन राज की कविता संग्रह पंछी के खोते की खुद्दी।

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