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पटना

साहित्य के बिना पत्रकारिता संस्कारविहीन : केजी सुरेश

हिन्दुस्तान टीम,पटनाPublished By: Newswrap
Mon, 11 Oct 2021 06:30 PM
साहित्य के बिना पत्रकारिता संस्कारविहीन : केजी सुरेश

पत्रकारिता में उन्माद, विद्वेष का कोई स्थान नहीं है। पत्रकारिता की भाषा संयम और संस्कार की होनी चाहिए। समाज का विश्वास बनाए रखना पत्रकारिता के समक्ष आज सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि आज सबकुछ संशय के घेरे में है।

ये बातें माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने पटना विश्वविद्यालय के हिंदी एवं पत्रकारिता विभाग में आयोजित व्याख्यान में कही। उन्होंने कहा कि साहित्य के बिना पत्रकारिता संस्कारविहीन है। उन्होंने आज की पत्रकारिता की भाषा पर चिंता जतायी। उन्होंने कहा कि सच दिखाने के नाम पर जैसी भाषा में चीजें दिखाई जा रही हैं, वह कई बार किसी सभ्य समाज से बाहर की चीज लगती है। आज जो मीडिया में प्रतिबिंबित हो रहा है, वह क्या भारतीय समाज का सत्य है। इस पर विचार किए जाने की जरूरत है। प्रो. सुरेश ने कहा कि आज नए सिरे से पाठकों-दर्शकों की सच्ची रुचियों को ध्यान में रखने की जरूरत है। पहले से ही दर्शकों-श्रोताओं की रुचियों को निर्धारित करना सही नहीं है। मौके पर पटना कॉलेज की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. कुमारी विभा, शिक्षक डॉ. मार्तण्ड प्रगल्भ, डॉ. पीयूष राज, डॉ. गौतम कुमार, प्रशांत रंजन समेत हिंदी व जनसंचार विभाग के स्नातक एवं स्नातकोत्तर के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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