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भारत के बच्चों के बीच कौशल शिक्षा मात्र 5 फीसदी : संजय

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के सचिव संजय कुमार ने कहा कि भारत में बच्चों के लिए कौशल शिक्षा केवल 5% है, जबकि बिहार में यह 1% है। उन्होंने शिक्षकों को बच्चों की जिज्ञासा बढ़ाने के लिए प्रश्न पूछने के लिए...

Newswrap हिन्दुस्तान, पटनाFri, 12 Sep 2025 08:16 PM
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भारत के बच्चों के बीच कौशल शिक्षा मात्र 5 फीसदी : संजय

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता सचिव संजय कुमार ने कहा कि भारत के बच्चों के बीच कौशल शिक्षा मात्र 5 फीसदी ही है। बिहार में यह महज एक फीसदी है। दुनिया के अन्य देशों में स्कूली शिक्षा के दौरान ही बच्चों को कोई न कोई एक स्किल (कौशल) जरूर दी जाती है। दक्षिण कोरिया में 12वीं तक के 90 प्रतिशत बच्चे कौशल प्रशिक्षित हैं। वे शुक्रवार को बापू सभागार में दो दिवसीय राष्ट्रीय शिक्षक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सीबीएससी और पाटलिपुत्र सहोदय स्कूल कॉम्प्लेक्स की ओर स्कूलों में विज्ञान प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित का एकीकृत शिक्षण मॉडल (स्टेम) शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह सम्मेलन आयोजित किया गया है।

शिक्षा में नवाचार और दक्षता को बढ़ावा देने के लिए सम्मेलन में देशभर के शिक्षक जुटे हैं। बच्चों से प्रश्न पूछें शिक्षक केंद्रीय शिक्षा सचिव ने शिक्षकों से आग्रह किया कि कक्षा में बच्चों को प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित करें। प्रश्न पूछेंगे तभी तो बच्चों की जिज्ञासा शांत होगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा में कौशल विकास को प्राथमिकता दी गई है। जापान और चीन के बच्चे कौशल में आगे हैं। मातृभाषा में बच्चों को शिक्षा देने के लिए प्रोत्साहित करना है। देशभर में 10 प्रतिशत बच्चे सीबीएससी बोर्ड से संबद्ध हैं। 2024-25 के यू डायस की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में एक करोड़ एक लाख शिक्षक हैं, इनमें 14 लाख शिक्षक सीबीएससी बोर्ड से जुड़े स्कूलों के हैं। बिहार के बच्चे गणित और विज्ञान में बेहतर हैं। इन विषयों में बिहार के बच्चे राष्ट्रीय औसत के लगभग हैं। बच्चों की क्षमता की पहचान कर हो प्रोत्साहन : दीपक राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने शिक्षकों से कहा कि वे बच्चों की क्षमता पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित करें। जिस बच्चे का जैसा रुझान है, वैसी शिक्षा देना बड़ी चुनौती भी है। हमलोग समग्र शिक्षा की बात करते हैं। विज्ञान, कला और वाणिज्य को एक साथ मिला डिग्री की बात करते हैं, लेकिन इस प्रावधान में जब तक बच्चों को आगे कॅरियर नजर नहीं आएगा, तब तक रुचि नहीं लेंगे। बेहतर शिक्षा देना सीबीएसई की प्राथमिकता : निदेशक सीबीएसई के अध्यक्ष राहुल सिंह ने कहा कि बच्चों को बेहतर शिक्षा देना हमारी प्राथमिकता है। विश्वस्तरीय शिक्षा के लिए हमें नए प्रयोग करने होंगे। इसके लिए शिक्षा में वैज्ञानिक सोच विकसित करनी होगी। नवाचार को प्रोत्साहित करना होगा। हमारा फोकस शिक्षकों को बेहतर प्रशिक्षण देना है, ताकि वे बच्चों को नये और बेहतर तरीके से पढ़ाएं। सीबीएसई के निदेशक (प्रशिक्षण) मनोज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक 295 जिलास्तरीय कार्यशाला में 11 हजार स्कूलों के प्रतिनिधि शामिल हुए हैं।

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