
बीपी और शुगर की दवा छोड़ने से 80% मरीजों को पड़ा ब्रेन स्ट्रोक
ठंड के बढ़ने के साथ ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। पिछले एक सप्ताह में पीएमसीएच और आईजीआईएमएस में 216 मरीज पहुंचे, जिसमें 80% ऐसे थे जो नियमित दवा नहीं ले रहे थे। डॉक्टरों का कहना है कि लक्षण दिखने पर चार घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचना जरूरी है, नहीं तो जान को खतरा हो सकता है।
ठंड बढ़ने के साथ ब्रेन स्ट्रोक के मरीज बढ़ रहे हैं। बड़े अस्पतालों में इस रोग के मरीज हर दिन भर्ती हो रहे हैं। इमरजेंसी और ओपीडी में इसके लक्षण और ब्रेन स्ट्रोक वाले दोनों तरह के मरीज पहुंच रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में पीएमसीएच और आईजीआईएमएस में 216 मरीज पहुंचे और भर्ती हुए। जिसमें पीएमसीएच में 90 और आईजीआईएमएस में 154 मरीज इलाज कराने आए। इसमें 80 फीसदी मरीज वैसे थे जो बीपी और शुगर की दवा नियमित नहीं ले रहे थे या बीच में छोड़ दी थी। पीएमसीएच के न्यूरो मेडिसिन विभाग के फिजिशियन डॉ. संजय कुमार ने बताया कि हर दिन 10 से 15 मरीज ब्रेन स्ट्रोक के आ रहे हैं।
इसमें 50 से 80 वर्ष उम्र के मरीज ज्यादा है, जिसमें 80 फीसदी ऐसे मरीज हैं जिन्होंने ब्लड प्रेशर और शुगर की दवा बीच में छोड़ दी थी या दवा नियमित तौर पर नहीं ली। नशा एक बड़ा कारण बना है। अधिक उम्र होने से भी कुछ मरीज को ब्रेन स्ट्रोक हुआ है। नवंबर से जनवरी तक जिस विधि से भी ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीज दवा ले रहे हैं उनको प्रत्येक दिन या नियमित जांच करते रहना है कि ब्लड प्रेशर और शुगर नियंत्रण में है या नहीं।
चार घंटे में अस्पताल पहुंचेंगे तो बचेगी जान
पीएमसीएच के न्यूरो फिजिशियन डॉ. संजय कुमार ने बताया कि पिछले 7 दिनों में ब्रेन स्ट्रोक के करीब 4 से 5 मरीजों की मौत हुई है। इसका बड़ा कारण रहा अस्पताल देर से पहुंचना। लक्षण दिखने पर मरीज चार घंटे के अंदर अस्पताल पहुंच गया तो उसका विशेष इलाज से पूर्ण रूप से जान बचायी जा सकती है। ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण है अचानक से आवाज लड़खड़ाना, किसी भी पैर या हाथ में कमजोरी होना, संतुलन बिगड़ना और आंख की रोशनी गायब होना। ऐसा दिखे तो देर नहीं करें तुरंत अस्पताल पहुंचे।
आईजीआईएमएस में 154 मरीज ब्रेन स्ट्रोक के पहुंचे
आईजीआईएमएस के इमरजेंसी और ओपीडी में प्रत्येक दिन 20 से 25 मरीज ब्रेन स्ट्रोक के पहुंच रहे हैं। आईजीआईएमएस के न्यूरो सर्जन डॉ. समरेंद्र सिंह ने बताया कि इमरजेंसी और ओपीडी दोनों में मरीज पहुंच रहे हैं। योगा और शारीरिक अभ्यास लगातार करते रहना है। लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचे। खासकर बीपी और शुगर के मरीज ठंड के मौसम तक नियमित जांच कराते रहें।

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