
भारतीय ग्रंथों में निहित ज्ञान का सार है श्रीमद्भागवत : राज्यपाल
पीयू के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग और प्रज्ञा प्रवाह (चिति) बिहार ने गीता जयंती समारोह आयोजित किया। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां ने गीता के ज्ञान का महत्व बताया और कहा कि यह हमें शांति और सह-अस्तित्व का पाठ पढ़ाती है। प्रो. शशिनाथ झा ने गीता के जीवन में संघर्षों को पार करने के महत्व पर प्रकाश डाला।
पीयू के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग एवं प्रज्ञा प्रवाह (चिति) बिहार के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को गीता जयंती समारोह का आयोजन किया गया। पटना विवि के सिनेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां बतौर मुख्य अतिथि और कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि के पूर्व कुलपति प्रो. शशिनाथ झा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां ने कहा कि भारतीय ग्रंथों में निहित ज्ञान का सार श्रीमद्भागवत गीता में है। हमारी बौद्धिक, आध्यात्मिक परंपरा पूरे विश्व को शांति और सहअस्तित्व का पाठ पढ़ा सकती है। हमें अपने विचारों को अपने आचार में लाने की जरूरत है।
उन्होंने गीता का संदेश देते हुए कहा कि बुद्धि कर्म प्रज्ञा और कर्म का समन्वय करके हम अपने कदम बढ़ाएं तो सफलता हमारे कदम चूमेगी। मुख्य वक्ता प्रो. शशिनाथ झा ने श्रीमद्भागवत गीता के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गीता हमें जीवन के संघर्षों में कर्म करते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। विशिष्ट अतिथि डॉ. मोहन सिंह ने अपनी विरासत और संस्कृति का राष्ट्रीय संदेश देते हुए स्वामी विवेकानंद के बारे में जानकारी दी। जिसमें उन्होंने समृद्ध विरासत द्वारा युवाशक्ति को जागृत करने के बारे में बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पटना विवि की कुलपति प्रो. नमिता सिंह ने की। उन्होंने समारोह के विषय की जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन प्रो. लक्ष्मी नारायण सिंह ने की।

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