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पहली बार देखी फिल्म, एक बच्चा था जो दौड़ रहा था

हिन्दुस्तान टीम,पटनाNewswrap
Sun, 14 Nov 2021 06:10 PM
पहली बार देखी फिल्म, एक बच्चा था जो दौड़ रहा था

दीदी पहली बार फिल्म देखी है। अभी तक बस सिनेमा के बारे में सुना था। सिनेमा में एक बच्चा बुधिया दौड़ लगा रहा था। अपना घर बालगृह के 14 साल के रवि कुमार के इतना कहने के साथ ही बगल में बैठे दीपक ने कहा कि मैंने भी पहली बार सिनेमा देखा। इतने बड़े पर्दे पर सिनेमा बहुत अच्छा लगा। सालों से रह रहे बालगृह से आए बच्चे काफी खुश थे, क्योंकि वो बड़े पर्दे पर सिनेमा देख रहे थे। ये सारा कुछ पटना बाल फिल्म महोत्सव में रविवार को सुबह 11 बजे से एक बजे तक दिखा। महोत्सव के दूसरे दिन सुबह 11 बजे से हिन्दी फिल्म दुरंतो दिखायी गयी। इस फिल्म को देखने के लिए राजधानी पटना के चार बालगृह से 50 बच्चों को लाया है।

इसमें अपना घर से 25 बच्चे, आशा किरण से दस, सूर्योदय बालगृह और मिकेश बालगृह से पांच-पांच बच्चे आए थे। पूरी फिल्म देखकर सभी बच्चे काफी खुश थे। आशा किरण की सुशिता कुमारी ने बताया कि तीन साल से वो अपनी बहन के साथ बालगृह में है। वो कहां से आयी उसे कुछ पता नहीं है। फिल्म देखकर लगा कि हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। वहीं तीन साल से आशा किरण में रह रही दस वर्षीय काजल ने बताया कि इतने बड़े पर्दे पर पहली बार फिल्म देखी है। अपना घर से आया रवि कुमार ने बताया कि वो पहले बनारस बालगृह में था। इसके बाद उसे यहां लाया गया है। रवि कुमार ने बताया कि आज से पहले कभी सिनेमा देखने नहीं निकला था। पहली बार सिनेमा देखकर उसे बहुत मजा आया। वहीं मितेश बालगृह कंकड़बाग से आये बलराज ने बताया कि वो दिल्ली बालगृह से 2016 में अपना घर लाया गया। इसके बाद 2017 में उसे मिकेश बालगृह लाया गया।

बुधिया सिंह को देख उत्साहित हुए बच्चे

दुरंतो सिनेमा के माध्यम से बालगृह के बच्चे में उत्साह बढ़े, वो भी हिम्मत जुटा र आगे अपने भविष्य के प्रति सचेत हों, इस मकसद से यह सिनेमा दिखाया गया। बाल फिल्म फेस्टिकल के रवि रंजन ने बताया कि पहली बार बालगृह के बच्चों को सिनेमा दिखाने के लिए बाहर लाया गया है। मोटिवेशनल फिल्म से उनके अंदर जज्बा बढ़ेगा। 2016 में बनी इस फिल्म ने 63वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का पुरस्कार भी जीता था। इस फिल्म में सबसे कम पांच साल की उम्र के मैराथन धावक बुधिया सिंह ने 48 मैराथन दौड़ लगाई थी। इसमें मनोज वाजपेयी एक कोच के रूप में और मयूर पटोले बुधिया सिंह के रूप में हैं।

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