fight against mosquito Taking medicines on your own is dangerous when you have fever - हिन्दुस्तान मच्छर को टक्कर: बुखार होने पर खुद से दवाएं लेना खतरनाक-Video DA Image

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हिन्दुस्तान मच्छर को टक्कर: बुखार होने पर खुद से दवाएं लेना खतरनाक-Video

मच्छर से बचने के लिए जागरूकता से बड़ा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। डेंगू, मलेरिया से बचना है तो बाहर ही नहीं घर की गंदगी को भी दूर करें। मच्छर काटने से बीमारी हो, उससे बेहतर है कि मच्छरों को पनपने ही न दें। इसके लिए जागरूकता फैलाएं। 

आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ की मुहिम मच्छर को टक्कर के तहत डॉक्टरों के बीच हुए संवाद में यही बातें निकलकर आईं। इसमें शहर के गणमान्य चिकित्सकों ने भाग लिया। चिकित्सकों ने न सिर्फ बीमारी के कारणों पर प्रकाश डाला बल्कि इलाज पर भी विस्तृत चर्चा की। सभी ने एक सुर में मच्छरजनित बीमारी से बचाव के लिए जागरूकता को बड़ा हथियार बताया। कहा कि जगरूकता हर स्तर पर होनी चाहिए। सरकार और आम जनता दोनों जबतक एक साथ नहीं आएंगे, तबतक मच्छरों से होने वाली बीमारी से नहीं बचा जा सकता है। बेतरतीब तरीके से मच्छर पैदा ही नहीं हो और उनके डंक से कैसे बचना है, इस मसले पर योजना बनाकर काम करने की जरूरत है। 

चिकित्सकों ने कहा कि  बीमारी होने पर खुद इलाज नहीं करें डॉक्टर से संपर्क करें। आसपास की गंदगी का सही से निपटारा करें।  सुबह और शाम में बदन को ढंक कर रखें। नीम, करंजी और सरसों के तेल में कपूर लगार शरीर में लगाने से मच्छरों से बचाव होगा।

इनका रखें ध्यान
आसपास की गंदगी का सही से निपटारा करें
सुबह और शाम  में बदन को ढंक कर रखें
मच्छर वाले क्षेत्र में नियमित फॉगिंग व छिड़काव 
घर के आसपास झाड़ी की कटाई हमेशा करते रहें 
जमे हुए पानी      में किसी भी तरह के तेल का छिड़काव करें
जलजमाव की स्थिति किसी भी हालत में नहीं रहने दें

बचाव के उपाय 
मच्छरों से होने वाली बीमारी और मरीजों का डाटा होना चाहिए। 
सभी सरकारी अस्पताल किसी एक केन्द्र को सूचना दें 
मरीज और उनके परिजनों को जागरूक किया जाए
हर समय गंदे पानी में पैदा हो रहे मच्छरों के लार्वा की जांच हो
बीमारी होने पर खुद इलाज नहीं करें डॉक्टर से संपर्क करें
बीमारी की पहचान  के लिए लोगों को जागरूक करें
नीम, करंजी और सरसों के तेल में कपूर लगार शरीर में लगाने से मच्छरों से बचाव होगा

हिन्दुस्तान की यह पहल काफी सराहनीय है। आम जनता जागरूक हो रही है। बचाव के लिए अगर प्रत्येक घर से लोग पहल करने लगेंगे तो बचाव हो सकता है। योजनाबद्ध तरीके से रसायनों का छिड़काव हो तो यह समस्या बहुत हद तक दूर हो जाएगी। 
- डॉ. मधुरेन्द्र कुमार सिन्हा, चर्म रोग विशेषज्ञ, एनएमसीएच। 

सिर्फ अस्पतालों से ही नहीं बल्कि घरों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट का निपटारा वैज्ञानिक तरीके से हो। स्लमवासियों को मुफ्त में मच्छरदानी का वितरण हो। स्कूल के सिलेबस में मच्छर से होने वाली बीमारियों और बचाव के उपाय को शामिल करना बहुत जरूरी हो गया है। 
-डॉ. अनिल कुमार, पटना एम्स

मच्छर तो वातावरण में रहेगें ही। हमें उनसे बचने के उपाय पर ज्यादा जोर देना होगा। रोग में होने वाले लक्षणों के आधार पर उन्हें पहचानना होगा। छोटे बच्चों को भी जागरूक करना होगा। हरेक वायरल फीवर को डेंगू नहीं समझें। 
-डॉ. ज्योर्तिमय सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, पटना डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल

हम लोगों का भी स्वास्थ्य कायकर्ता के रूप में बचाव करना जरूरी कर्तव्य है। मच्छरजनित रोग में जागरूकता से बेहतर कोई उपाय नहीं है। समाज में जाकर समझाना होगा लोगों को बताना होगा कि कैसे मच्छर के काटने से कैसे बचना होगा।
-डॉ. अरविंद चौरसिया, आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल

शहर के ड्रेनेज सिस्टम को जाम से मुक्ति दिलानी होगी। आयुर्वेद में मच्छरों को भगाने के लिए धूपन द्रव्य का भी इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है। सरकार स्टेट फार्मेसी भी खोले ताकि जनता को सस्ती दवाएं प्राप्त हो सके। 
-डॉ. शंभू शरण, आयुर्वेद कॉलेज एवं अस्पताल

आयुर्वेद में मच्छरों से बचाव के बेहतर तरीके बताए गए हैं। नीम, करंज और सरसों के तेल में कपूर शरीर में लगाने से मच्छर दूर रहते हैं। नीम के तेल का छिड़काव करने से भी मच्छरों का प्रकोप बहुत कम हो जाता है। जहां नाला खुले हैं उसे बंद किया जाए। 
-डॉ. दिनेश्वर प्रसाद, प्राचार्य, राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज, पटना 

मच्छर से बचाव ही इसका सबसे बेहतरीन उपाय है। शाम को पूरी बांह के कपड़े पहनना चाहिए। बच्चों को बचाने के लिए अभिभावकों का भी शिक्षित होना आवश्यक है। अपने आसपास किसी तरह का कचरा या जल का जमाव नहीं होने देना चाहिए। इससे मच्छर पनपते हैं और बाद में बीमारियों के कारक बनते हैं।
-डॉ. राजेश सिन्हा, आईजीआईएमएस

तालाबों में कैम्बुसिस मछली या कुछ ऐसी बैक्टीरिया डालना होगा जो लार्वा को खा जाते हैं। प्लेटलेट्स ही सब कुछ है तो इस वहम में नहीं रहें। आयुर्वेद के नाम पर जो पपीते का पत्ता देते हैं वह सब विटामिन का संपूर्ण ढांचा लिए नहीं रहता है। डेंगू सात दिन में स्वत: खत्म हो जाता है। हालांकि सावधानी रखें तो बेहतर है। 
-डॉ. राजन कुमार

सबसे ज्यादा इम्यून सिस्टम बच्चों और बूढ़ों का कमजोर होता है। अगर किसी में बीमारी के आम लक्षण भी आएं तो उसे तुरंत इलाज कराना चाहिए। डेंगू को हड्डी तोड़ बुखार भी कहा जाता है। ऐसे मरीजों में साल भर बाद भी हड्डी में दर्द के लक्षण पाये गये हैं। इसलिए सावधानी बरतना जरूरी है। 
-डॉ. बीएन चतुर्वेदी, सीनियर रेजीडेंट, एम्स

हमें अपने रेसिस्टेंट पावर को मजबूत बनाना होगा। हमारे आयुर्वेद में दिये गये ऋतुचर्या को पूरा करें। बच्चों में जन्म के बाद ही स्वर्णप्राशन करायें ताकि उसकी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो। 
-डॉ. संतोष कुमार विश्वकर्मा, आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल

जो काम सरकार और आईएमए नहीं कर रहा है उसे हिन्दुस्तान अखबार कर रहा है। लोगों के बीच इस तरह की जागरूकता फैलाने से समाज को ही लाभ होगा। आईएमए राज्य के सभी जिला ब्रांच को पत्र लिखकर यह बताएगा कि अपने-अपने क्षेत्र में मच्छरों से होने वाली बीमारी के बारे में जागरूक किया जाए। 
-डॉ. ब्रजनंदन कुमार, सचिव, आईएमए 

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