
स्थल निरीक्षण किए बिना ही ठेकेदारों को भुगतान कर रहे इंजीनियर
बिहार में ग्रामीण कार्य विभाग के इंजीनियर ठेकेदारों को बिना निरीक्षण के भुगतान कर रहे हैं। विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसी शिकायतें मिलीं तो कार्रवाई होगी। सरकार ग्रामीण सड़कों की स्थिति सुधारने के लिए विभिन्न उपाय कर रही है, लेकिन इंजीनियरों का पालन न करना समस्या है।
ग्रामीण कार्य विभाग के इंजीनियर ठेकेदारों पर मेहरबान हैं। सड़क निर्माण की प्रक्रिया में बिना स्थल निरीक्षण किए ही ठेकेदारों को पूरे पैसे का भुगतान हो रहा है। बीते दिनों विभागीय समीक्षा के दौरान इसकी शिकायत मिलने पर विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है। इंजीनियरों को चेतावनी दी गई है कि अगर भविष्य में इस तरह की शिकायत सामने आई तो ऐसे इंजीनियरों पर न केवल विभागीय कार्रवाई होगी बल्कि ठेकेदारों को किए गए भुगतान की राशि भी उनसे वसूल की जाएगी। बिहार में ग्रामीण सड़कों की लंबाई एक लाख 18 हजार किलोमीटर है। सरकार के स्तर पर इन सड़कों को गुणवत्तापूर्ण बनाए रखने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है।
हजारों करोड़ खर्च किए जा रहे हैं ताकि ग्रामीण सड़कों का नेटवर्क और बेहतर हो सके। विभाग ने इसके लिए नई मरम्मत नीति भी बनाई है। अब सड़कों का निर्माण होने पर सात साल तक एजेंसियों को देख-रेख करना होगा। सड़कों की निगरानी तंत्र को और बेहतर करने को कई ठोस प्रयास किए गए हैं। विभागीय कामकाज में मोबाइल अप्लीकेशंस का सहारा लिया जा रहा है। सरकार की इस कवायद का मकसद राज्य के किसी भी इलाके से कम समय में राजधानी पहुंचने की योजना को साकारा करना है। लेकिन विभाग के इंजीनियर ही सरकार की इस मंशा पर पानी फेर रहे हैं। विभाग ने इंजीनियरों के लिए एक मानक तय कर रखा है कि उन्हें महीने में कम से कम कितनी सड़कों का निरीक्षण करना है। इसमें निर्माण के साथ ही मरम्मत की जाने वाली सड़कों को भी शामिल किया गया है। लेकिन विभाग के इस आदेश का पालन इंजीनियर नहीं कर रहे हैं। निरीक्षण के बाद सड़कों की स्थिति की रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड करनी है जो विभाग को नहीं मिल पा रही है। राज्य की ग्रामीण सड़कों की सही तरीके से मरम्मत नहीं हो रही है। विभाग ने चेतावनी दी है कि अगर उनके कामकाज में सुधार नहीं हुआ तो अब उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक व अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। बॉक्स में हमारा बिहार एप नहीं कर रहा काम पटना। ग्रामीण सड़कों की निगरानी के लिए विभाग ने हमारा बिहार-हमारी सड़क मोबाइल एप विकसित किया। शुरू के दिनों में इस एप पर लोगों ने शिकायतें की। शिकायत मिलने पर विभाग के स्तर पर उसका निवारण भी किया गया पर धीरे-धीरे यह एप निष्क्रिय होता जा रहा है। इसके माध्यम से अनुरक्षणाधीन 63 हजार किलोमीटर ग्रामीण सड़कों की निगरानी की व्यवस्थण की गई थी। इस एप से लोगों को गड्ढों या अन्य समस्याओं की रिपोर्ट फोटो के साथ देनी है। संबंधित अधिकारी द्वारा उस समस्या को तय समय सीमा में हल करना था, जो अभी नहीं हो रहा है। लोगों को शिकायतें अपलोड करने में भी परेशानी हो रही है।

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