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जरबेरा-शिमला मिर्च की खेती से ढाई लाख रुपये महीने की कमाई

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लोग खेती को हेय दृष्टि से देखते हैं लेकिन इसे फायदे का सौदा साबित कर रहे हैं बिहारशरीफ के मेघी गांव के आलोक कुमार। वह गुजरात में रिसर्चर की नौकरी छोड़कर खेती में कई प्रयोग कर रहे हैं। अभी वह जरबेरा, शिमला मिर्च और सहजन की बारहमासी खेती को बढ़ावा देने में जुटे हैं। वह युवाओं को खेती करने के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं ताकि गांवों से पलायन रुक सके और युवा आत्मनिर्भर हो सकें। 

चार भाई और 18 बीघे जमीन। सभी भाई नौकरी के चक्कर में गांव छोड़कर दूसरे प्रदेशों में पलायन कर चुके थे। गांव में माता-पिता अकेले रहने को विवश। ऐसे में खेती योग्य भूमि भी बेकार हो रही थी। इन बातों ने बिहारशरीफ के मेघी गांव के आलोक कुमार को इतना झकझोरा कि गुजरात में रिसर्चर का काम छोड़ गांव आकर बागवानी करने लगे और महज पांच महीने में जरबेरा और शिमला मिर्च की खेती कर ढाई लाख रुपये महीना कमाने लगे।

32 वर्षीय आलोक ने खेती को किफायती बनाने के लिए अभी बारहमासी सहजन की खेती शुरू कर दी है। आधा एकड़ जमीन पर सहजन की खेती कर रहे हैं। वे बताते हैं सहजन काफी कम समय की सब्जी होती है, लेकिन बहुत फायदेमंद होती है। इसको देखते हुए बारहमासी सहजन की खेती शुरू की है। वे बताते हैं कि सिर्फ जरबेरा से एक साल में 15-20 लाख रुपये की कमाई हो सकती है। आलोक ने पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। वह कहते हैं कि अभी खेती में विभिन्न प्रयोग कर रहा हूं ताकि गांव में रहकर अच्छी कमाई हो सके। मैं युवाओं को भी खेती से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चला रहा हूं।

दोस्त ताने मारने लगे
आलोक बताते हैं उनके पिता वीरेन्द्र कुमार किसान हैं। वे अक्सर बीमार रहते थे। खेती में अक्षम हो गये। जब भी मां को फोन करता पिता की बीमारी की बातकर दु:ख जताने लगती। मैं गुजरात में रिसर्चर था। वहां पर बिहार-यूपी के सैकड़ों लोग पलायन का दर्द सुनाते थे। फिर मैंने 2017 में नौकरी छोड़ा और गांव आ गया। गांव आया तो लोगों ने कहा नौकरी नहीं लगी तो गांव आ गया है। दोस्त भी मजाक बनाने लगे, लेकिन मैंने तय कर लिया कि बागवानी की शिक्षा को खेतों में प्रयोग कर गांव को समृद्ध बनाऊंगा। हां पॉलिहाऊस बनाने में परेशानी आयी। बैंकों के चक्कर लगाने पड़े। फिर भी मैंने हिम्मत नहीं हारी। लगभग छह महीने तक बिहारशरीफ और पटना की खाक छानी। खेती की शुरुआत शिमला मिर्च से की। आठ कट्ठे खेत में ही शिमला मिर्च लगाया। पहली ही फसल में इतना अच्छा उत्पादन हुआ कि मन गदगद हो गया। 

जॉब क्रिएटर बनें बिहार के युवा
नौकरी की खोज में युवा दर-दर की ठोकर ही नहीं खा रहे हैं बल्कि ठगी के शिकार भी हो रहे हैं। अगर थोड़ी मेहनत खेत में कर लें तो सोना पैदा कर सकते हैं। हां, इसके लिए खेती का तरीका बदलना होगा। बागवानी से अच्छा कोई काम नहीं है। हर दिन रोमांच और पैसा दोनों मिलता है। इसलिए बिहार के युवा जॉब क्रिएटर बनकर अपने प्रदेश और देश भविष्य संवारने का काम कर सकते हैं। बिहार के युवा हर क्षेत्र में बेहतर कर रहे हैं। प्रोत्साहन मिले तो यह क्षेत्र भी अछूता नहीं रहेगा। 

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  • Web Title:Earning 2 lakhs 50 thousand per month cultivation of capsicum