
ड्राइविंग टेस्ट में हर दिन 50 फीसदी लोग हो रहे फेल, जानिए कहां आ रही है समस्या
पटना में हर दिन ड्राइविंग लाइसेंस के लिए टेस्ट में लगभग 50% लोग फेल हो जाते हैं। मुख्य कारण पार्किंग और कंप्यूटर टेस्ट में असफलता है। लर्निंग लाइसेंस के बाद भी आवेदक फेल हो रहे हैं। 18 से 28 साल के युवा सबसे अधिक प्रभावित हैं। पुनः टेस्ट देने पर 800 रुपये का चालान भी लगता है।
सड़क के किनारे दो खड़ी गाड़ियों के बीच अपनी गाड़ी को समानांतर रूप में पार्क करके दिखाना। पार्किंग से निकाल कर कार को पीछे करके सड़क पर निकालना। इस प्रक्रिया को करने में सबसे ज्यादा लोग ड्राइविंग टेस्ट में फेल हो रहे हैं। जिला परिवहन कार्यालय के मुताबिक हर दिन सौ लोगों का ड्राइविंग लाइसेंस के लिए टेस्ट लिया जाता है, लेकिन इसमें 50 से 55 लोग फेल हो जाते हैं। यानी हर दिन 50 फीसदी के लगभग लोग ड्राइविंग टेस्ट में फेल हो जाते हैं। मालूम हो कि लापरवाह ड्राइविंग ना हो। सड़क सुरक्षा का ख्याल रखा जाए। इसके लिए ड्राइविंग टेस्ट को सख्त कर दिया गया है।
इसका असर ड्राइविंग टेस्ट देने आने वाले आवेदकों पर दिखता है। लर्निंग बनाने के बावजूद वो प्रैक्टिकल टेस्ट में फेल हो जाते हैं। हालांकि लर्निंग बनाने के बाद उन्हें छह महीने का समय दिया जाता है। इसके बाद भी फेल हो जाते हैं। एक बार फेल होने पर आठ सौ रुपये का चालान ड्राइविंग लाइसेंस के टेस्ट में फेल होने वाले 18 से 28 साल तक के आवेदक अधिक होते हैं। एक बार फेल होने के बाद एक माह का समय मिलता है। दोबारा टेस्ट होने में भी 40 से 45 लोग फेल हो जाते हैं। दूसरी बार टेस्ट देने के लिए आठ सौ रुपये का चालान कटता है।
लर्निंग लाइसेंस के लिए कंप्यूटर टेस्ट लिया जाता है। इसमें दस सवाल में सात का जवाब देना होता है। प्रत्येक प्रश्न के उत्तर के लिए 30 सेंकेंड का समय मिलता है। इसमें हर दिन पांच सौ लोगों को स्टॉल मिलता है। इसमें 40 से 45 फीसदी लोग हर दिन टेस्ट में फेल हो जाते हैं। प्रायोगिक जांच में ये जानकारी मांगी जाती हैं ट्रैफिक साइंस: विभिन्न तरह की सड़क मसलन रुकें, आगे स्कूल है, नो पार्किंग का मतलब पूछा जाता है, यातायात नियम: लेन बदलना, सिग्नल लाइट (लाल, पीली और हरी बत्ती), ओवटेकिंग, हॉर्न का इस्तेमाल, सीट बेल्ट, पार्किंग के नियम और एंबुलेंस को रास्ता देना आदि सवाल पूछे जाते हैं ।
सुरक्षित ड्राइविंग : धुंध में फॉग लैंप का उपयोग, पीछे देखने वाले शीशे का महत्व, सामने से आ रही गाड़ी की हेडलाइन से चकाचौंध वाहन नियंत्रण : गाड़ी को सीधी लाइन में चलाना, रिवर्स करना और पार्क करना यू-टर्न : कहां पर यू-टर्न लेना, कहां पर मोड़ना, मोड़ने से पहले किस लेन में जाना रोड सेंस : चौराहे पर सही लेन चुनना, सही सिग्नल का इस्तेमाल करना, सड़क पर दूसरों के साथ सुरक्षित रूप से बातचीत करना।
गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल इस्तेमाल नहीं करना कोट ड्राइविंग टेस्ट में हर दिन लोग फेल होते हैं। कई तो दायें और बायें भी नहीं बता पाते हैं। कई चरणों में टेस्ट लिया जाता है। काफी कम लोग होते हैं जो पास कर पाते हैं। जो टेस्ट में फेल होते हैं उन्हें दुबारा पास करने का मौका दिया जाता है।

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