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रेरा के सख्त नियमों से फ्लैटों की रजिस्ट्री में आई गिरावट

रेरा के नियम-कानून सख्त होते ही बिल्डरों द्वारा विकसित फ्लैट और प्लॉट की रजिस्ट्री पर ब्रेक लग गया है। अभी रजिस्ट्री करानेवाले नहीं पहुंच रहे हैं। इसका असर राजस्व पर भी पड़ा है। हालत यह है कि निबंधन का काम घटकर एक चौथाई ही रह गया है।

पटना अवर निबंधक सत्यनारायण चौधरी ने बताया कि सितंबर में निबंधन के कागजातों में भी कमी आयी है। ब्रेक लगने के पहले निबंधन के लिए प्रतिदिन 70 से 80 के बीच कागजात आते थे। इनमें फ्लैटों के निबंधन के 10 से 12 कागजात होते थे। एक फ्लैट पर औसतन चार लाख रुपये तक राजस्व की प्राप्ति होती है। इसके अलावा पटना और आसपास इलाके में विभिन्न कंपनियों के द्वारा जमीन के बड़े हिस्से को विकसित करके इसे प्लॉटों में बांटा जाता है। इन छोटे-छोटे प्लॉटो के 20 से 25 कागजात प्रतिदिन आते रहे हैं। जो फिलहाल बंद है।

लक्ष्य से काफी पीछे : सितंबर में पटना सदर को 26 करोड़ रुपये राजस्व उगाही का लक्ष्य दिया गया था। लेकिन 12 दिन बीत जाने के बावजूद 20 प्रतिशत से भी कम राजस्व प्राप्त हो सका है। निबंधन कार्यालय को इस महीने मात्र 4.86 करोड़ रुपये ही आय हुई है। अवर निबंधक कहते हैं कि यह हाल रहा तो इस महीने लक्ष्य का पचास प्रतिशत भी राजस्व नहीं प्राप्त होगा। उन्होंने बताया कि अगस्त तक पटना सदर सौ प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर रहा था।

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  • Web Title:Downfall in registry of flats due to hard rules of RERA