एमबीबीएस की सीटें फुल सिर्फ डेंटल कोर्स में 40 बचीं
पिछली बार एमबीबीएस कोर्स में कुछ सीटें खाली रह गई थीं। अगर निजी मेडिकल कॉलेजों में पूरा कोर्स करने में लगभग 70 लाख से एक करोड़ रुपये खर्च होते हैं। कुछ प्राइवेट कॉलेजों की फीस थोड़ी कम है।

राज्य के मेडिकल कॉलेजों में नामांकन की प्रक्रिया समाप्त हो गई है। बिहार के मेडिकल कॉलेजों में मॉपअप राउंड के बाद सभी सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सीटें भर गई हैं।
हालांकि, इस बार सीटें भरी ही नहीं बल्कि निजी कॉलेजों में नामांकन लेने वाले छात्रों की भारी भीड़ हो गई थी। डेढ़ सौ से अधिक छात्र-छात्राएं जो ड्राफ्ट बनाकर आए थे उन्हें लौटना पड़ा। इस बार सिर्फ निजी डेंटल कोर्स में लगभग 40 सीटें बची रह गईं। बिहार के मेडिकल कॉलेजों में सरकारी एमबीबीएस में लगभग 1150 और वहीं निजी मेडिकल कॉलेजों में इस बार एमबीबीएस की सीटों की संख्या बढ़ाकर करीब 1050 हो गई है। इसके बाद भी सीटें भर गई हैं।
पिछली बार एमबीबीएस कोर्स में कुछ सीटें खाली रह गई थीं। अगर निजी मेडिकल कॉलेजों में पूरा कोर्स करने में लगभग 70 लाख से एक करोड़ रुपये खर्च होते हैं। कुछ प्राइवेट कॉलेजों की फीस थोड़ी कम है। वहीं, अन्य कॉलेजों में लगभग एक करोड़ रुपये का खर्च है। बीसीईसीई के ओएसडी अनिल कुमार ने बताया कि बिहार के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें भर गईं। निजी में सीटें और होतीं तो वह भी भर जाती हैं। इस बार नामांकन लेने वाले छात्रों की लंबी कतारें थीं।
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