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एनएमसीएच गेट पर तोड़फोड़, ओपीडी ठप, सभी ऑपरेशन टले

प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के पीजी कोर्स में बिहार राज्य के लिए सुरक्षित 50 प्रतिशत कोटे में पटना एम्स के छात्र-छात्राओं के दाखिल के विरोध में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल दूसरे दिन मंगलवार को भी जारी रही। इससे मरीजों को भारी फजीहत हुई। पीएमसीएच में छह और एनएमसीएच में तीन मरीजों की मौत हुई। इलाज ठप रहने से गुस्साए मरीजों और परिजनों ने एनएमसीएच गेट पर तोड़फोड़ की। ओपीडी में एक भी पर्चा नहीं कटा। सभी ऑपरेशन टाल दिए गए। पीएमसीएच में भी 13 ऑपरेशन टल गए, हालांकि ओपीडी में सीनियर डॉक्टर बैठे। आईजीआईएमएस में भी ओपीडी बाधित रही। जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल जारी है। 

मरीज भर्ती नहीं किए जाने पर गुस्साए लोगों ने एनएमसीएच मेन गेट को बंद कर दिया। सड़क जाम कर हंगामा करने लगे। वहां से गुजर रहे डॉक्टरों की गाड़ियों के शीशे तोड़े। एंबुलेंस सेवा को भी बाधित किया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने लोगों को भगाया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच झड़प भी हुई। इससे पहले प्रदर्शनकारी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. चंद्रशेखर से मिलकर समस्याओं को बताया। हड़ताल के कारण अस्पताल के किसी भी ओटी में एक भी मरीजों का ऑपरेशन नहीं हो सका। ओपीडी में सन्नाटा पसरा रहा। तीन मरीज की मौत हुई है। हालांकि अस्पताल अधीक्षक ने बताया कि तीनों गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। उन्होंने बताया कि सीनियर डॉक्टरों व प्रतिनियुक्ति डॉक्टर लगातार इमरजेंसी की सेवा दे रहे हैं। 

मरीज को भर्ती नहीं किया तो भड़के लोग
प्रदर्शनकारी रीता कुमारी ने बताया कि शिशु रोग विभाग में जब एक बच्चे का भर्ती करने एक मरीज पहुंचे तो डॉक्टरों ने भर्ती लेने से इंकार कर दिया। विरोध करने पर सुरक्षाकर्मियों ने धक्का मारते हुए कहा कि बच्चे को कहीं फेंक दो। कई परिजनों ने बताया कि दो दिन से उनका मरीज भर्ती है। कोई देखनेवाला नहीं है। इससे लोग आक्रोशित हो गए और हंगामा करना शुरू कर दिया। वहीं, सबलपुर के आदित्य पासवान ने बताया कि उसकी पत्नी रुबी देवी के पेट का ऑपरेशन होना था। महुआ से आए रामसोबित राय ने बताया कि पेशाब  के रास्ते का ऑपरेशन होना था। खाजेकला के कन्हैया पोद्दार ने बताया कि उसकी पत्नी का प्रसव होना है। वह दर्द से बैचेन है। कोई देखनेवाला नहीं है। रोसड़ा के मंजू कुमारी के कान का ऑपरेशन होना था। 

पीएमसीएच में 13 ऑपरेशन टले, पलायन कर गए मरीज
पीएमसीएच में 13 ऑपरेशन टल गए। करीब एक एक सौ से अधिक मरीज अस्पताल से पलायन कर गए। मंगलवार को इमरजेंसी के कई बेड खाली दिखे। वहीं छह मरीजों की मौत हो गई। 25 अतिरिक्त डॉक्टर पीएमसीएच को उपलब्ध कराए गए हैं। यहां ओपीडी में 2044 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन कराया। इमरजेंसी में 390 मरीज पहुंचे। 16 बड़े और 13 छोटे यानी कुल 29 ऑपरेशन किए गए। अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन प्रसाद ने बताया कि ओपीडी में आने वाले सभी मरीजों का इलाज हो रहा है। इमरजेंसी सेवा में कहीं कमी नहीं छोड़ी गई है। 

पीएमसीएच में जांच रिपोर्ट नहीं मिल रही मरीजों को
हड़ताल के कारण मरीजों को रिपोर्ट मिलने में काफी परेशानी हो रही है। समय पर रिपोर्ट नहीं मिलने से मरीजों के परिजन और पीपीपी मोड में चल रहे एमआरआई सेंटर के कर्मियों के बीच हंगामा भी हो रहा है। इमरजेंसी में एमआरआई और सिटी स्कैन जांच तो हो रही है लेकिन रिपोर्ट हड़ताल बाद देने की बात कही गई है। सूत्रों की माने तो एक अप्रैल से एमआरई की जांच रिपोर्ट पेंडिंग है। अभी भी 30 से 35 मरीजों का एमआरआई जांच हो रही है। 

बैठक रही बेनतीजा, मांग पर अड़े हैं जूनियर डॉक्टर
एनएमसी के प्राचार्य डॉ. सीताराम प्रसाद ने पहल करते हुए आईएमए के डॉक्टरों के साथ बैठक की। हालांकि बैठक बेनतीजा साबित हुई। अपनी मांगों पर अड़े जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि जब तक एम्स के छात्र का बिहार कोटे से पीजी में नामांकन में काउंसिलिंग का प्रावधान हटाया नहीं जाता है। तब तक हड़ताल जारी रहेगी। बैठक में बिहार जेडीए संयोजक डॉ. रवि रंजन कुमार रंजन ने कहा कि इस तरह का नियम बिहार में ही क्यों लागू किया गया है। इस प्रावधान से बिहार के छात्र वंचित रह जाएंगे। हालांकि प्राचार्य डॉ. सीताराम प्रसाद, पीएमसीएच के प्राचार्य डॉ. रामजी प्रसाद, आईएमए सचिव डॉ. अजय कुमार व प्रेसीडेंट डॉ. सहजानंद ने जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन से मरीजों के हितों व लोकसभा चुनाव को देखते हुए सही समय पर सही फोरम का इंतजार करने को कहा। इन लोगों ने स्वास्थ्य सचिव से जेडीए के शिष्टमंडल को मिलकर समस्या का निदान निकालने की सलाह दी। जिसे जेडीए ने तत्काल अस्वीकार कर दिया और हड़ताल पर डटे रहने की बात कही। 

ये है जूनियर डॉक्टरों की मांग : 
- पीजी एमएसी-2019 में एम्स पटना के एमबीबीएस पास छात्रों का बिहार राज्य की 50 प्रतिशत सीट में दाखिला नहीं लिया जाए क्योंकि पटना एम्स में जब बिहार कोटे के छात्रों का दाखिला नहीं होता है तो उनका कैसे बिहार कोटे में लिया जा रहा है। 
- सीनियर रेजीडेंट की योग्यता की अधिकतम उम्र सीमा 47 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष किया जाए क्योंकि दिल्ली में 40, मध्य प्रदेश और छतीसगढ़ समेत कई राज्यों में उम्र सीमा 45 साल है। 
- आईजीआईएमएस की तर्ज पर अन्य मेडिकल कालेजों में पीजी के छात्रों का स्टाइपेंड 50 हजार, 55 हजार और 60 हजार से बढ़ाकर 70 हजार, 80 हजार तथा 90 हजार प्रतिमाह किया जाए। 
- आईजीआईएमएस की तर्ज पर ही अन्य मेडिकल कालेजों के यूजी छात्रों का स्टाइपेंड 15 से बढ़ाकर 24 हजार किया जाए। 

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  • Web Title:Demolition on NMCH gate OPD stalled all operations stopped