पैसा निकासी नहीं होने से डेढ़ लाख स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं की प्रोत्साहन राशि फंसी
राज्य में स्नातक उत्तीर्ण डेढ़ लाख छात्राओं को 50-50 हजार की प्रोत्साहन राशि नहीं मिली है। वित्त विभाग ने 750 करोड़ की राशि जारी की है, लेकिन उच्च शिक्षा विभाग की प्रक्रिया में देरी हो रही है। यदि जल्द राशि नहीं निकाली गई, तो नए वित्तीय वर्ष में और भी समस्याएं हो सकती हैं।

राज्य में स्नातक उत्तीर्ण डेढ़ लाख छात्राओं को 50-50 हजार की दर से प्रोत्साहन राशि अब तक नहीं मिली है। हालांकि, वित्त विभाग ने इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग को 750 करोड़ की राशि जारी की है। छात्राओं के बैंक खाते में राशि भेजने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने लगभग सभी प्रक्रिया पूरी भी कर ली है, बावजूद राशि की निकासी में परेशानी हो रही है। संशय है कि प्रोत्साहन योजना की यह राशि कहीं मार्च बंदी (मार्च क्लोजिंग) में न फंस जाए। स्नातक उत्तीर्ण छात्राएं लगभग डेढ़ साल से प्रोत्साहन राशि का इंतजार कर रही हैं। राशि की निकासी में देरी होने की स्थिति में इन छात्राओं को योजना के लाभ के लिए और अधिक इंतजार करना होगा।
जल्द राशि निकासी नहीं हुई तो नए वित्तीय वर्ष में राशि निकासी की प्रक्रिया पूरी करने में देर हो सकती है। उच्च शिक्षा विभाग ने इस योजना के तहत आवेदन करने वाली छात्राओं का सर्टिफिकेट विश्वविद्यालयों से जांच भी करा लिया है। इस योजना के लिए विभिन्न विश्वविद्यालयों से स्नातक उत्तीर्ण 5 लाख 78 हजार छात्राओं ने ऑनलाइन आवेदन किया था। इसमें से एक लाख 98 हजार स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं के खाते में प्रोत्साहन राशि सितंबर अंत तक भेजी गई थी। अब शेष बची 3 लाख 80 हजार छात्राओं को प्रोत्साहन राशि दिया जाना है, लेकिन वित्त विभाग से 750 करोड़ की राशि ही स्वीकृत होने के कारण इसमें से डेढ़ लाख छात्राओं को ही प्रोत्साहन राशि का फिलहाल भुगतान हो सकेगा। सर्टिफिकेट जांच में उत्तीर्णता सत्यापित होने वाली छात्राओं को ही राशि मिलेगी। इस योजना के तहत आवेदन करने वाली करीब दो लाख छात्राओं को प्रोत्साहन राशि के लिए और इंतजार करना पड़ेगा।आधार के कारण पहले भी देर हो चुकी है : भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआईई) से छात्राओं का आधार जांच की अनुमति मिलने में देरी हुई थी। इसके लिए गजट प्रकाशन से लेकर प्रक्रिया पूरी करने में छह माह से अधिक समय लग गया। इसके बाद फिर लगभग डेढ़ माह से चुनाव आचार संहिता के कारण मामला अटका रहा।
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