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कंप्यूटर पुरी पीठ की ही देन है : निश्चलानंद सरस्वती

कंप्यूटर पुरी पीठ की ही देन है : निश्चलानंद सरस्वती

श्रीगोवर्द्धनमठ, पुरी पीठ ओडिशा के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने गुरुवार को पटना में दावा किया कि कंप्यूटर पुरी पीठ की ही देन है। पुरी के 143वें शंकराचार्य श्री भारतीकृष्ण तीर्थजी के तीन वैदिक सूत्रों के आधार पर ही उनके अंग्रेज शिष्यों ने कंप्यूटर विकसित किया था। बाद में शृंगेरी पीठ ने इस पर शोध करके उसे और विकसित किया।

वहीं उन्हें देश में दो-दो दिन पर्व-त्योहार मनाने के पीछे विदेशी साजिश लगती है। कहा कि देश के शासन तंत्र के निरंकुश रहने से विदेशी साजिश सफल हो जा रही है।

पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती गुरुवार की शाम पटना पहुंचने के बाद भक्तों को संबोधित कर रहे थे। इसके पूर्व बिहार के पांच दिवसीय यात्रा के क्रम में वे जगदीशपुर, शेखपुरा से यहां पहुंचे। आशियाना मोड़ के पास और बाद में रामनगरी मोड़ पर उनका भव्य स्वागत किया गया। आशियाना फेज-1 में गिरिजानंदन शर्मा न उनकी पत्नी प्रेमकुमारी देवी ने उनका स्वागत और पादूका पूजन किया। आचार्य भक्तिचरण शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चार किया। स्वामी जी के साथ उनके प्रमुख शिष्य स्वामी निर्विकल्पानंद, पुरी पीठ आनंदवाहिनी की अध्यक्ष इंदिरा झा, अशोक सिंह भी आए हैं। स्वागत में एनके ठाकुर, कार्यक्रम समन्वयक विवेक विकास, अमित पांडेय, केके तिवारी आदि भी शामिल हुए। शंकराचार्य पंचविंशति पट्टाभिषेक महोत्सव में भाग लेने यहां आए हैं। 17 फरवरी को विद्यापति भवन में शंकराचार्य के पद पर उनके 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर विराट सम्मान समारोह होगा।

शंकराचार्य ने इस मौके पर भक्तों की कई जिज्ञासाओं को भी शांत किया। एक भक्त का सवाल था कि दो-दो दिन पर्व त्योहार क्यों मनाए जा रहे हैं? इस पर कहा कि दरअसल यहां सूर्य सिद्धांत के विशेषज्ञ कम हैं। इससे इस तरह की समस्या हो रही है। अंग्रेजी तारीख से गणना किए जाने से समस्या हो रही है। तिथि की गणना सूर्य सिद्धांत से होनी चाहिए। एक दूसरे भक्त का सवाल था कि भाग्य क्या है? शंकराचार्य ने कहा कि पूर्व जन्म का फलाफल ही भाग्य है। इष्ट के चयन कैसे करें के सवाल पर कहा कि संयुक्त परिवार का चलन कम होने से यह समस्या हो रही है। मस्तिष्क देखकर व अपनी रुचि से इष्ट का चयन करना चाहिए। क्रोध पर काबू पाने के उपाय बताते हुए कहा कि जिस पर क्रोध आये उससे क्षमा मांग लेना चाहिए। साथ ही उस दिन उपवास करना चाहिए। भगवान राम ने उचित समय पर उचित मात्रा में व उचित पात्र पर क्रोध किया था। प्रभु की भक्ति कैसे करें ? इस सवाल पर कहा कि प्रभु के स्वभाव न प्रभाव से उनकी भक्ति पायी जा सकती है।

आज गोष्ठी में लेंगे भाग

शंकराचार्य शुक्रवार को पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास मां शांभवी इंक्लेव में एक गोष्ठी में भाग लेंगे। दोपहर में वे बिहटा आईआईटी के छात्रों के बीच वैदिक गणित, वेद और विज्ञान की प्रासंगिकता पर व्याख्यान देंगे। 17 फरवरी को आशियानानगर फेज-1 पार्क में धर्म,अध्यात्म और राष्ट्र पर गोष्ठी में भाग लेंगे, जबकि शाम में विद्यापति भवन में उनका सम्मान होगा।

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  • Web Title:computer is made due to the puri peeth: Nishchalanand Saraswati