जलवायु अनुकूल खेती से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा 20 फीसदी बढ़ी
जलवायु अनुकूल खेती के कारण मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा 20 प्रतिशत और नाइट्रोजन में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। फॉस्फोरस और पोटाश में भी 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 2019-20 से शुरू हुई इस खेती ने 65 बिलियन लीटर पानी की बचत की है। सभी 38 जिलों में 190 गांवों में यह खेती की जा रही है।

जलवायु अनुकूल खेती के कारण मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा 20 प्रतिशत बढ़ी है। साथ ही नाइट्रोजन में भी 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। फॉस्फोरस और पोटाश की मात्रा में 10-10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। सोमवार को यह जानकारी कृषि विभाग ने दी है। विभाग के अनुसार 2019-20 से राज्य में जलवायु अनुकूल खेती शुरू हुई थी। इससे न सिर्फ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में मदद मिलेगी, बल्कि कृषि क्षेत्र को टिकाऊ और लाभकारी भी बनाया जा सकता है। जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम के शुरुआती समय में मिट्टी का पीएच मान 6.25 से 8.48 मापा गया था, वहीं पांच वर्ष बाद इसमें सुधार आया और यह 5 प्रतिशत की कमी के साथ पीएच मान 6.02 से 8.29 दर्ज किया गया है।
शून्य जुताई तकनीक एवं फसल अवशेष प्रबंधन का परिणाम मृदा नाइट्रोजन पर देखा गया है। उपलब्ध नाइट्रोजन की मात्रा में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।फॉस्फोरस में 10 प्रतिशत की वृद्धि के साथ उपलब्ध फॉस्फोरस की मात्रा 17.89 से 45.26 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पाई गई है। जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम से पूर्व पोटाश की मात्रा 78.62 से 312 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी, जो अब 10 प्रतिशत वृद्धि के साथ 82.34 से 350 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पाई गई है।करीब 65 बिलियन लीटर पानी की हुई बचतराज्य के सभी 38 जिलों के 190 गांवों में पूरी तरह जलवायु अनुकूल खेती हो रही है। वर्ष 2019-25 तक कुल 2.63 लाख एकड़ भूमि में खरीफ, रबी एवं गरमा की फसलें उगाई गईं। इससे धान में 48.47 अरब लीटर, गेहूं में 8.91 अरब लीटर और मक्का में 8.42 अरब लीटर पानी की बचत हुई है।
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