DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अध्यक्ष ने कहा, गणेश के टॉपर होने में संदेह नहीं, लिखित परीक्षाओं में उसने बेहतर किया 

बिहार बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर ने इंटर आर्ट्स टॉपर के बारे में चल रही चर्चाओं को विराम दे दिया। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि गणेश के टॉपर होने में कोई संदेह नहीं है। उसने लिखित परीक्षाओं में बेहतर किया है।

गणेश के कॉपियों की पूरी जांच हुई है। प्रैक्टिकल की दोबारा जांच पर कोई विचार नहीं किया जा रहा। जब उनसे सवाल पूछा गया तो आनंद किशोर ने बताया कि गणेश दलित परिवार से आता है। हो सकता है कि थोड़ा विलंब से पढ़ाई से शुरू किया होगा।  
गुरुवार को बोर्ड अध्यक्ष ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी। अध्यक्ष ने यह भी बताया कि स्क्रूटनी के लिए आवेदन 3 से 12 जून तक किया जा सकेगा। बोर्ड मुख्यालय में स्क्रूटनी की जा सकेगी। जून में ही स्क्रूटनी समाप्त हो जाएगी।

प्रतियोगी परीक्षा में पास करने वाले विद्यार्थियों के स्क्रूटनी का बिहार बोर्ड में आवेदन लेकर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई होगी। अध्यक्ष ने कहा कि प्रैक्टिकल एग्जाम अगले साल से होम सेंटर पर नहीं कराने पर विचार किया जा रहा है। पूरे देश के बोर्ड में प्रैक्टिकल के मार्क्स स्कूल देते हैं। बोर्ड मार्क्स नहीं देता है। बताया कि सप्लीमेंट्री जुलाई फर्स्ट वीक में और इसका रिजल्ट जुलाई लास्ट वीक में दिया जाएगा।      
गणेश पर किया जा रहा था शक : बता दें कि इंटर आर्ट्स की परीक्षा में गणेश ने टॉप किया है। उसे 82.6 अंक मिले थे। लेकिन जो विषय उसने चुने थे, उसको लेकर शंका जतायी जा रही थी। साथ ही उसकी उम्र पर भी सवाल उठाए गए थे। 
पासपोर्ट और गेस पेपर से की थी तैयारी
गणेश ने किताब की जगह पासपोर्ट और गेस पेपर से परीक्षा की तैयारी की थी। आर्थिक तंगी के कारण उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह किताब खरीद सके। इसी कारण उसने पढ़ाई के लिए उन्हीं विषयों का चयन किया जिसमें कम मेहनत कर वह सफलता पा सके। परीक्षाफल प्रकाशित होने के बाद पहली बार गुरुवार को मीडिया के सामने आये गणेश ने अपनी जिंदगी के दुखभरे पहलू से भी अवगत कराया। 
कम मेहनत में अधिक मिलते अंक 
बातचीत के दौरान पूछे गये कुछ सवालों का तो उसने ठीक से जबाव दिया, लेकिन कुछ सवाल पर भटकता भी दिखा। अनिवार्य विषय में से एक संगीत की पढ़ाई करने के सवाल पर उसने साफगोई से कहा कि कम मेहनत कर अधिक अंक लाने के लिए उसने इस विषय को चुना। 
सारेगामा बजा कर सुनाया 
उसने सार्वजनिक रूप से हारमोनियम पर सारेगामा बजा कर सुनाया पर संगीत के सुर व ताल के संबंध में पूछे गये कुछ सवाल का उसने ठीक से जबाव नहीं दिया। हिन्दी के कुछ कवि व लेखकों के नाम तो बताये पर उनकी जन्मतिथि नहीं बता पाया।
काम की तलाश में आया समस्तीपुर 
 गणेश ने बताया कि कैंसर से पिता के 2009 में निधन के बाद पूरे परिवार की उस पर जिम्मेवारी आ गयी थी। आर्थिक तंगी के कारण वह काम की तलाश में समस्तीपुर आया। जहां पहले अखबार बेच कर गुजारा किया। फिर शिवाजीनगर के लक्ष्मीनिया हाईस्कूल के मैट्रिक की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उतीर्ण की। उसके बाद आरएसजेएन इंटर कॉलेज में नामांकन कराया। उसने बताया उसकी गरीबी व बेवशी को देखते हुए कॉलेज प्रबंधन ने उसकी कुछ फीस माफ कर दी, जबकि शेष पैसे किस्त में जमा करने की अनुमति दी। इसी वजह से उसने यहां नामांकन कराया। 
मजदूरी करके पूरी की पढ़ाई 
महादलित परिवार से आने वाले गणेश ने स्पष्ट रूप से यह भी कहा कि मेहनत मजदूरी करने के कारण वह नियमित क्लास नहीं कर पाता था। इसके बावजूद कॉलेज से उसे सहयोग मिलता था। उसने बताया कि वह पढ़ लिख कर किसी तरह सरकारी नौकरी करना चाहता है ताकि अपने परिवार का भरण पोषण कर सके।

                 
                 
                  
 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Chairman says, no doubt on topper Ganesh, performed well in written