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एक्सक्लूसिव: गोदाम में पड़ी हैं कैंसर की दवाएं पर मरीज खरीद रहे बाजार से

प्रतीकात्मक तस्वीर

बिहार मेडिकल सर्विसेज इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लि. (बीएमएसआईसीएल) के गोदाम में नौ माह से कैंसर की महंगी दवाएं पड़ी हुई हैं। बावजूद पीएमसीएच में आने वाले मरीजों को दवा बाजार से खरीदनी पड़ रही है। जबकि ये दवाएं मरीजों को मुफ्त में मिलनी चाहिए।

बीएमएसआईसीएल के अधिकारियों का कहना है कि पीएमसीएच ने कैंसर की दवा की डिमांड नहीं की, इसीलिए अस्पताल में सप्लाई नहीं की गई। वहीं डीएमसीएच और एनएमसीएच में नौ प्रकार की दवाएं भेजी गई हैं।  पीएमसीएच में तीन गुनी अधिक दर पर कैंसर की दवा खरीद का मामला प्रकाश में आने के बाद बीएमएसआईसीएल के अफसरों ने पहली बार इस पर प्रतिक्रिया जारी की है। अधिकारियों का कहना है कि गोदाम में नौ प्रकार की पर्याप्त दवाएं हैं। सभी दवाएं महंगी हैं। राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा गठित कमेटी की अनुशंसा पर ये दवाएं खरीदी गई हैं। ये ऐसी दवाएं हैं, जो कैंसर के मरीजों को सामान्य तौर पर दी जाती हैं।  जो दवा बाजार में 45 हजार प्रति वायल उपलब्ध है, उसे बीएमएसआईसीएल द्वारा सरकारी अस्पतालों को 25 हजार में उपलब्ध कराया जा रहा है। ये ही दवाएं कैंसर के मरीजों को मुफ्त में दी जानी है। 

अधीक्षक बोले-कैंसर रोग विभाग की गलती है
पीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि कैंसर रोग विभाग की गलती है। कैंसर रोग विभाग यदि दवाओं की डिमांड भेजता तो जरूर बीएमएसआईसीएल से मांग की जाती। इसीलिए विभाग के हेड से पूछा गया है कि उन्होंने डिमांड क्यों नहीं की। बीएमएसआईसीएल के प्रबंध निदेशक संजय कुमार सिंह ने कहा कि दवा खरीद के समय ही सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को जानकारी हो गई थी। यदि एनएमसीएच व डीएमसीएच ने दवा की डिमांड की तो पीएमसीएच ने क्यों नहीं की। यह आश्चर्य की बात है। जो अस्पताल मांग रहे हैं वहां भेजी जा रही है। 

आईजीआईएमएस में भी पकड़ी गई थी गड़बड़ी
2017-18 में आईजीआईएमएस में भी मुख्यमंत्री सहायता कोष से खरीदी जाने वाली दवाओं में गड़बडी उजागर हुई थी। ड्रग इंस्पेक्टर विकास शिरोमणि ने राजाबाजार स्थित एक दवा दुकान में छापेमारी की थी तो पता चला था कि संस्थान के कैंसर रोग विभाग के एक डॉक्टर खुद दवा की कंपनी चला रहे हैं। दवा कंपनी का कार्यालय वे अपने राजाबाजार स्थित एक अपार्टमेंट में खोले हुए हैं। उसी कंपनी की दवा वे कैंसर के मरीजों को लिखते हैं। 

प्रधान सचिव के निर्देश पर हुई जांच से खुलासा
स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव के निर्देश पर जब इसकी विस्तृत जांच कराई गई तो मामला सही पाया गया। बाद में आईजीआईएमएस की एक टीम ने भी इस मामले में जांच की तो आरोप सही निकला। उक्त डॉक्टर के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग में कार्रवाई करने का मामला लंबित है। जानकारों का कहना है कि कैंसर की महंगी दवाओं में मिलने वाले कमीशन के खेल के कारण ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर मरीजों को बाजार की दवा लेने पर मजबूर कर रहे हैं।  

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  • Web Title:Cancer drugs In warehouse patients buying from market in PMCH in Patna of Bihar