BS 6 fuel will be available by year end in Patna - पटना में साल के अंत तक मिलेगा बीएस-6 ईंधन DA Image

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पटना में साल के अंत तक मिलेगा बीएस-6 ईंधन

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इस वर्ष के अंत तक राजधानी समेत राज्यभर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का बीएस-6 ईंधन मिलने लगेगा। इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) इसके लिए बरौनी रिफाइनरी को अपग्रेड कर रहा है। इससे बिहार समेत पूर्वी यूपी, झारखंड व नेपाल में बीएस-6 ईंधन की सप्लाई होगी।

अभी दिल्ली व एनसीआर को छोड़ देशभर में  बीएस-4 ईंधन मिल रहा है। राज्य के बड़े शहरों पटना, मुजफ्फरपुर, गया और भागलपुर में वायु प्रदूषण बढ़ने के बाद यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आईओसीएल के ईडी विभाष कुमार ने बताया कि बरौनी रिफाइनरी में मेजर यूनिट का मोडिफिकेशन हो चुका है। मेजर यूनिट के तहत प्राइम जी + लगाया जा रहा है। नये ईंधन के लिए मैकेनिकल और सिविल काम पूरा हो चुका है। जल्द ही इसकी मंजूरी मिल जाएगी। इसके अलावा कुछ अन्य यूनिटों पर भी काम हो रहा है। 

महंगा होगा यह ईंधन
बीएस-4 की तुलना में बीएस-6  ईंधन महंगा होगा। पेट्रोल पर 24 पैसे प्रति लीटर और डीजल पर 66 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी होगी। हालांकि बढ़ी कीमत को लेकर तेल कंपनियां फिलहाल ग्राहकों से ये पैसे नहीं वसूलेंगी। इस बारे में सरकार से बात चल रही है। 

बिहार के लिए क्यों है जरूरी
बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष प्रो. एके घोष ने बताया कि बीएस-6 ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी। पटना समेत बिहार के शहरों में वायु प्रदूषण के मुख्य कारणों में एक वाहनों से निकलने वाला धुआं भी है। पर्षद के अध्यक्ष ने बताया कि नये ईंधन से हृदय और फेफड़े से होने वाली बीमारियों में भी कमी आएगी। 

अगले वर्ष से बीएस-6 गाड़ियों में एडवांस एमिशन कंट्रोल सिस्टम
अप्रैल 2020 से सभी निर्माता कंपनियां बीएस-6 मानक के ईंधन के हिसाब से गाड़ियां बनाएंगी। नई गाड़ियों में एडवांस एमिशन कंट्रोल सिस्टम रहेगा। इस सिस्टम से पता चल जाएगा कि यह गाड़ी बीएस-6 स्टैंडर्ड की है। अभी देश की कंपनियां बीएस-4 के फ्यूल मानक के हिसाब से वाहन बना रही हैं। लेकिन एक अप्रैल 2020 से जो भी नए वाहन बाजार में आएंगे, उनके लिए बीएस-6 के मानक को पूरा करना जरूरी होगा। हालांकि बीएस 4 के वाहनों में भी बीएस 6 ईंधन का इस्तेमाल होगा। 

अप्रैल 2020 तक देश के 11 शहरों में बीएस-6 
बीएस 6 ईंधन को एक अप्रैल 2019 से देश के 13 बड़े शहरों में लागू करने की योजना थी, लेकिन अभी केवल एनसीआर व दिल्ली में ही इसकी शुरुआत हो सकी है। योजना में शामिल बाकी 11 मेट्रोपोलिटन सिटी में अभी तक यह शुरू नहीं हो पाया है।  एनसीआर में 23 जिलों में केवल 17 जिलों पर यह मिल रहा है। 
वहीं, तेल कंपनियों को बाकी बचे 11 शहरों में एक अप्रैल 2020 से पहले बीएस 6 उपलब्ध कराने का संशोधित लक्ष्य मिला है। इन शहरों में कानपुर, लखनऊ, कोलकाता, अहमदाबाद, सूरत, बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई, पुणे व सोलापुर शामिल हैं। हालांकि यूपी के आगरा में एक अप्रैल से यह ईंधन मिलने लगा है। 

क्या है बीएस
बीएस का मतलब है भारत स्टेज। इसका संबंध उत्सर्जन मानकों से है। उत्सर्जन मानक को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तय करता है। भारत सरकार ने वर्ष 2000 से बीएस उत्सर्जन मानक की शुरुआत की थी। 

बीएस-6 से फायदे
- गाड़ियों की दक्षता बढ़ जाएगी
- प्रदूषण कम होगा
- इसमें सल्फर की मात्रा बीएस 4 की तुलना में घटकर 50 पीपीएम से 10 पीपीएम रह जाएगी। यानी सल्फर की मात्रा पांच गुनी तक कम होगी। 
- डीजल कारों में नये ईंधन के इस्तेमाल से पीएम यानी पार्टिकुलेट मैटर 80 फीसदी तक कम होगा। 
- नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा डीजल कारों में 70 फीसदी व पेट्रोल कारों में 25 फीसदी तक घटेगी।

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