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दोहरी चुनौतियों से जूझ रहे पटना विश्वविद्यालय के नेत्रहीन छात्र

हम तो अपने काम बिना सहारे के कर लेते हैं। सपने संजोते हैं और उन्हें पूरे होते भी देखते हैं, लेकिन एक नेत्रहीन के साथ ऐसी बात नहीं है। उन्हें कदम-कदम पर सहारे की जरूरत पड़ती  है। उनकी आंखों ने दुनिया नहीं देखी है, बस सबकुछ कल्पनाओं    के रंगों में संजोई होती हैं। एक हौसला ही है, जो उन्हें आम जिंदगी जीना सिखाती है। लेकिन, जब उम्मीदें टूटने लगें तो हौसले को गहरा धक्का लगता है। हम बात कर रहे हैं पटना विश्वविद्यालय के मिंटो नेत्रहीन छात्रावास के विद्यार्थियों के बारे में, जहां उनको अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, जिस कारण उन्हें आए दिन दोहरी चुनौतियां से जूझना पड़ता है। 

छात्रावास के कमरे में पटना लॉ कॉलेज के छात्र आदित्य नारायण तिवारी  और पटना कॉलेज का छात्र दिनेश से मुलाकात हुई। बात जब शुरू हुई तो उन्होंने समस्याओं की झड़ी लगा दी।

छात्रों की सबसे बड़ी समस्या सहायक की है। विश्वविद्यालय में शिक्षण के लिए कोई सहायक नहीं है। ऐसे में जैसे-तैसे पढ़ाई करनी होती है। विश्वविद्यालय की ओर से डिजिटल लाइब्रेरी या टॉकिंग लाइब्रेरी की भी सुविधा नहीं दी गई है। आंखे हैं नहीं कि किताब देख कर पढ़ सके। ऐसे में टॉकिंग लाइब्रेरी ही सहारा है। लाइब्रेरी से नेत्रहीन छात्रों को डीसी प्लेयर जारी होना चाहिए, ताकि वे क्लास रूम में लेक्चर को रिकार्ड कर सकें, लेकिन यह भी सुविधा नहीं मिल पा रही है। ऐसे में दूसरे छात्र ही सहारा होते हैं। उन्हीं से किताब पढ़वा कर सुनते हैं। ब्रेल लाइब्रेरी भी पटना विश्वविद्यालय में नहीं है। इस सुविधा की मांग तो राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ के द्वारा लगातार होती रही है। 

छात्र वृत्ति बंद, नहीं मिलती फीस में राहत
मिंटो नेत्रहीन छात्रावास में रहनेवाले विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें साढ़े छह हजार रुपए छात्रवृत्ति मिलती थी, लेकिन वह तीन साल से बंद है। कॉलेज या विश्वविद्यालय फीस में छूट नहीं मिलती है। रीडर भत्ता मिलता था, पर अब वह भी बंद है। 

कई सुविधाएं शुरू कराईं : डीएसडब्ल्यू
इस संबंध में पटना विश्वविद्यालय के डीएसडब्ल्यू प्रो. एनके झा ने बताया कि पहली बार तो हमलोग नेत्रहीन छात्रावास को अपने अधिकार क्षेत्र में लिए हैं। उसके बाद से कई सुविधाएं बहाल कराईं। हॉस्टल की साफ-सफाई कराई। छात्रावास में मेस की सुविधा भी शुरू हो गई है। हॉस्टल के जीर्णोद्धार के लिए सरकार को पत्र लिखा गया है। खेल के लिए भी जगह आवंटित की गई है। नेत्रहीन विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति को लेकर हमारे पास इस तरह की कोई कोई शिकायत नहीं आई है। 

यहां समस्याएं तो बहुत सारी हैं। विश्वविद्यालय में शिक्षण के लिए कोई सहायक नहीं मिला हुआ है। डिजिटल लाइब्रेरी या टॉकिंग लाइब्रेरी की व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन ये सुविधाएं यहां उपलब्ध नहीं हैं। काफी मांग के बाद राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ की ओर से मेस शुरू किया गया है। हमारी परेशानियों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
आदित्य नारायण तिवारी

हॉस्टल की जर्जर स्थिति है। कोई शौचालय या बरामदा साफ नहीं करता है। खुद से शौचालय साफ करवाना पड़ता है। इसी तरह हॉस्टल परिसर भी खुद से साफ करवाना पड़ता है। सप्लाई वाले नल का पानी पीना पड़ता है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से हमारे लिए जो भी जरूरी सुविधाएं हैं, वे मुहैया होनी चाहिए।
मुकुल कुमार

पटना विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से परीक्षाओं में सह लेखक की सुविधा मिलती थी, लेकिन अब यह सुविधा बंद कर दी गई है। अब इसके लिए खुद से जुगाड़ करना पड़ता है। विश्वविद्यालय में हमारे लिए किसी तरह की फीस माफी नहीं है। नामांकन में जो निर्धारित फीस लगती है, वही मुझे भी देनी पड़ी। 
दिनेश कुमार

मिंटो नेत्रहीन छात्रावास एक अनाथालय की तरह स्वचालित हॉस्टल बन कर रह गया है। डीसी प्लेयर लाइब्रेरी से जारी होना चाहिए था, ताकि नेत्रहीन छात्र शिक्षकों के लेक्चर रिकार्ड कर सकें, लेकिन यह सुविधा नहीं मिल पाती है। विश्वविद्यालय में हमारे लिए ब्रेल लाइब्रेरी नहीं है, जिससे अध्ययन में दिक्कत होती है। 
संतोष कुमार यादव

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  • Web Title:Blind students of Patna University battling double challenges