DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

आर्थिक सर्वेक्षण: देश में सबसे तेज रही बिहार की विकास दर

उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने बिहार की 13वीं आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश की

वर्ष 2017-18 में बिहार की विकास दर देश में सबसे तेज 11.9 फीसदी रही। वित्तीय वर्ष 2016-17 की विकास दर 9.9 प्रतिशत की तुलना में यह दो फीसदी अधिक है। जबकि दोनों ही वर्षों में राष्ट्रीय विकास दर सात फीसदी के करीब रही। उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने बजट सत्र के प्रथम दिन विधानमंडल के दोनों सदनों में बिहार की 13वीं आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश करते हुए यह जानकारी दी।  

आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18  के अनुसार वर्तमान मूल्य पर 2017-18 में बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 4 लाख 87 हजार 628 करोड़ और 2011-12 के स्थिर मूल्य पर 3 लाख 61 हजार 504 करोड़ था। फलत: 2017-18 में वर्तमान मूल्य पर प्रति व्यक्ति आय 42 हजार 242 तथा स्थिर मूल्य पर 31 हजार 316 रुपये रही। वर्ष 2017-18 में सर्वाधिक 14.6 प्रतिशत वृद्धि दर तृतीयक क्षेत्र (सेवा क्षेत्र) में दर्ज की गई। 

रेवेन्यु सरप्लस राज्य बना रहा बिहार  
वहीं, बिहार एक दशक से भी अधिक से राजस्व अधिशेष (रेवेन्यु सरप्लस) बरकरार रख रहा है। राजस्व अधिशेष 2013-14 के 6 हजार 441 करोड़ से दूने से भी अधिक बढ़कर 2017-18 में 14 हजार 823 करोड़ पहुंच गया। वर्ष 2018-19 में यह 21 हजार 312 करोड़ तक पहुंच सकता है।  

राजस्व में 70 फीसदी की वृद्धि 
चार वर्षों में राजस्व में 70 फीसदी की वृद्धि हुई है। वर्ष 2013 -14 से 2017-18 के बीच राज्य का अपना कर राजस्व 19 हजार 961 करोड़ से बढ़कर 23 हजार 742 करोड़ और करेतर राजस्व (खनन, लगान इत्यादि से प्राप्त कर) 1,545 करोड़ से 3,507 करोड़ हो गया। वहीं, इस अवधि में केंद्रीय करों में हिस्सा 34 हजार 829 करोड़ से 65 हजार 83 करोड़ रु़ और सहायता अनुदान 12 हजार 584 करोड़ से 25 हजार 720 करोड़ हो गया। इस तरह राज्य सरकार का कुल राजस्व 2013-14 के 68 हजार 919 करोड़ से बढ़कर 2017-18 में एक लाख 17 हजार 447 करोड़ हो गया। 

प्राथमिक घाटा कम हुआ 
राज्य के प्राथमिक घाटा में कमी दर्ज की गयी। यह 2016-17 के 8 हजार 289 करोड़ से घटकर 2017-18 में 5 हजार 251 करोड़ रह गया। इसके कारण सकल राजकोषीय घाटा भी 2016-17 के 16 हजार 480 करोड़ से घटकर 2017-18 में 14 हजार 305 करोड़ रह गया। जो सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 2.9 प्रतिशत और 3 प्रतिशत की राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम की सीमा से नीचे है। 

विकास कार्यों में खर्च में भी हुई वृद्धि 
वर्ष 2013-14 और 2017-18 के बीच विकास कार्यों में राजस्व खर्च 80 प्रतिशत बढ़कर 54 हजार 456 करोड़ से 98 हजार 152 करोड़ हो गया। वहीं, विकासेतर राजस्व व्यय इस अवधि में 25 हजार 945 करोड़ से 38 हजार 271 करोड़ हो गया। वर्ष 2017-18 में कुल व्यय का लगभग 72 प्रतिशत हिस्सा विकासमूलक प्रकृति का था और 28 प्रतिशत विकासेतर प्रकृति का। 

कृषि एवं विनिर्माण क्षेत्रों में इजाफा 
बिहार में अनाजों के उत्पादन में भी वृद्धि  हुई जो 2013-14 के 15.72 लाख टन से  4.4  प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दर्शाते हुए 2017-18 में 17.35 लाख टन हो गया। वहीं सड़कों के निर्माण में सार्वजनिक निवेश पिछले सात वर्षो के दौरान 16.3 प्रतिशत की दर से बढ़ा। सड़क क्षेत्र के बजट में सात वर्षों में तिगुनी वृद्धि हुई। ग्रामीण पथों पर सार्वजनिक निवेश करीब 30 फीसदी की वार्षिक दर से बढ़ा है। भवन निर्माण निगम को बिहार संग्रहालय और सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र के लिए पुरस्कार प्राप्त हुए। वहीं, बिहार में बिजली की उपलब्धता में 2011-12 के 1712 मेगावाट की तुलना में 2017-18 में 2,823 मेगावाट की वृद्धि हुई। 

मानव विकास पर खर्च में हुई वृद्धि 
वर्ष 2011-12 से 2017-18 के बीच बिहार में प्रति व्यक्ति विकास व्यय 15.8  प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ा है। इस अवधि में बिहार में शिक्षा पर व्यय 10 हजार 214 करोड़ से 14.4 प्रतिशत बढ़कर 26 हजार 394 करोड़ हो गया जो संपूर्ण भारत के 12. 5 प्रतिशत औसत से अधिक है। इसी प्रकार, इन 7 वर्षों में बिहार में स्वास्थ्य पर व्यय की वार्षिक वृद्धि दर 22 प्रतिशत के उच्चतर स्तर पर रही। दूसरी ओर, वर्ष 2012-13 से 2016-17 तक की अवधि में प्रारंभिक कक्षाओं में नामांकन 2.3 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ा और 2012-13 के 214.87 लाख से बढ़कर 2016-17 में 235.64 लाख हो गया। प्राथमिक स्तर पर छीजन दर (ड्रॉप आउट) में 2012-13 (31.7 प्रतिशत) से 2016-17 (22.2 प्रतिशत) तक 9.5 प्रतिशत अंकों की गिरावट आई। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Bihars 13th Economic Survey Report Bihars growth rate fastest in country