
मध्यम कुपोषित बच्चे भी पोषण अब पुनर्वास केंद्र में रखे जाएंगे
बिहार में पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) अब मध्यम रूप से कुपोषित बच्चों को भी शामिल करेगा। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस कदम का उद्देश्य बच्चों को गंभीर कुपोषण से बचाना है। राज्य में 41 एनआरसी हैं, जो कुपोषण की चुनौती से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव का हिस्सा हैं।
राज्य के पोषण पुनर्वास केंद्रों (एनआरसी) में अब मध्यम रूप से कुपोषित बच्चों को भी रखा जाएगा। अब तक सिर्फ गंभीर रूप से कुपोषित बच्चे इन केंद्रों में रखे जाते रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इसको लेकर सभी जिलों और मेडिकल कॉलेज अस्पतालों को दिशा-निर्देश जारी किया है। विभाग ने कहा है कि मध्यम कुपोषित बच्चों का गंभीर रूप से कुपोषित होने का खतरा रहता है। इसको देखते हुए यह फैसला किया गया है, ताकि कुपोषण से बच्चों को शिकार होने बचाया जा सके। राज्य में ऐसे केंद्रों की संख्या 41 हैं। विभाग के पदाधिकारी ने बताया है कि राज्य में कुपोषण की गंभीर चुनौती से निपटने के लिए एक बड़ा और महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किया है।
इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने निर्देश जारी किया है। मध्यम कुपोषित बच्चों में रिकेट्स, एनीमिया और विटामिन की कमी या अन्य चिकित्सकीय जटिलताएं पायी जाती हैं। उनके गंभीर रूप से कुपोषित में परिवर्तित होने का जोखिम अधिक रहता है। मालूम हो कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक बिहार में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में दुबलेपन की दर 22.9 प्रतिशत है। इनमें गंभीर दुबलेपन की दर 8.8 है। अंतरराष्ट्रीय जर्नल द लैंसेट, पीडियाट्रिक्स और मैटरनल एंड चाइल्ड न्यूट्रिशन में प्रकाशित अध्ययनों ने साबित किया है कि गंभीर कुपोषण से निपटने के लिए केवल उपचार ही नहीं, बल्कि प्रारंभिक पहचान और रोकथाम पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। आईजीआईएमएस पटना में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. रिजवान अहमर ने बताया कि मध्यम कुपोषित बच्चों को एनआरसी में शामिल करने का फैसला ‘देर से उपचार’ की जगह ‘जल्द हस्तक्षेप’ करना है।

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