
छह नई विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं इस साल पूरी होंगी: एडीजी
बिहार में पुलिस कांडों की जांच की गति बढ़ाने के लिए इस साल के अंत तक करीब एक दर्जन फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) चालू होंगी। पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में एफएसएल पहले से हैं, जबकि नई लैब गयाजी, बेतिया, छपरा, मुंगेर, पूर्णिया और सहरसा में 2026 तक शुरू होंगी।
पुलिस कांडों में वैज्ञानिक अनुसंधान की गति बढ़ाने के लिए इस साल के अंत तक राज्य में करीब एक दर्जन एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) काम करने लगेंगी। इनमें पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर में एफएसएल संचालित हैं। गयाजी, बेतिया, छपरा, मुंगेर, पूर्णिया और सहरसा में नई एफएसएल 2026 के अंत तक चालू होंगी। इनके लिए भवन बन गए हैं। दरभंगा और रोहतास एफएसएल के लिए भवन बन रहा है। बिहार पुलिस के एडीजी (सीआईडी) पारसनाथ ने सोमवार को सरदार पटेल भवन स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राजगीर और पूर्णिया एफएसएल के लिए 13.40 करोड़ से उपकरण खरीदे जाएंगे।
छह एफएसएल में उपकरण के लिए 163 करोड़ का प्रस्ताव गृह विभाग से स्वीकृत हो गया है। अब इसे केंद्रीय गृह मंत्रालय को स्वीकृति के लिए भेजा गया है। एडीजी ने बताया कि इस वर्ष मार्च तक राजगीर और पटना में एफएसएल में साइबर फॉरेंसिक यूनिट शुरू हो जाएगी। इसके शुरू होने से मोबाइल और कंप्यूटर फारेंसिक जांच राज्य में ही हो सकेगी। अगले चरण में मुजफ्फरपुर और भागलपुर में भी साइबर फॉरेंसिक यूनिट शुरू करने की योजना है। इसके लिए नेशनल फारेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी से करार किया गया है। इसके अलावा पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर एफएसएल के एक-एक डीएनए यूनिट स्थापित करने का प्रस्ताव भी गृह विभाग को सौंपा गया है। एडीजी ने बताया कि वर्तमान में विधि विज्ञान प्रयोगिशालाओं में 89 सहायक निदेशकों और 100 वरीय वैज्ञानिक सहायकों की संविदा पर नियुक्ति फरवरी तक पूरी होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि जुलाई 2024 में नए कानून के लागू होने के बाद से सात साल से अधिक सजा वाले मामलों में एफएसएल जांच अनिवार्य कर दी गई है। वर्ष 2024 में एक जुलाई से 31 दिसंबर के बीच 5141 कांडों के 25,285 प्रदर्शों की जांच की गई। वहीं, 2025 में कुल 10995 कांडों के 56,511 प्रदर्शों की जांच पूरी की गई। प्रेस वार्ता के दौरान सीआईडी के डीआईजी दलजीत सिंह मौजूद थे।

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