सावन समा गया आंखों में, नींद नहीं आती रातों में...
बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में रविवार को कवयित्री सम्मेलन आयोजित हुआ। कवयित्रियों ने सावन के रंग में रचनाएं प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. मधु वर्मा ने की। वरिष्ठ कवयित्री डॉ. पूनम आनन्द...

बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में रविवार को कवयित्री सम्मेलन का आयोजन हुआ। मौके पर कवयित्रियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कीं। झमाझम बारिश के बीच उनकी रचनाओं में सावन का रंग दिखा। सम्मेलन की उपाध्यक्ष डॉ. मधु वर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। सम्मेलन का आरंभ डॉ. मीना कुमारी परिहार की वाणी-वंदना से हुआ। वरिष्ठ कवयित्री डॉ. पूनम आनन्द ने विरह की इन पंक्तियों से श्रोताओं को मुग्ध कर दिया कि हरी हरी चूड़ियां, माथे पर बिंदियां, उड़ गयी हे सखी आज मेरी आंखों की निंदियां, प्रियतम बिना सखी सूनी है डगरिया, किसे सुनाऊं सखी आज अपनी पैजानियां”। चर्चित कवयित्री अभिलाषा कुमारी ने विरह की पीड़ा को इन पंक्तियों में अभिव्यक्ति दी कि सावन समा गया आंखों में/ नींद नहीं आती रातों में, फिर रखो हाथ हाथों में, नींद नहीं आती रातों में।
कवयित्री राजकांता राज ने इन पंक्तियों से श्रोताओं का मन जीत लिया कि मेरे आंगन आया सावन, याद किसी की लाया सावन, विरहन की सूनी आंखों से दूर कहां जा पाया सावन। कवयित्री लता प्रासर, डॉ. मधु वर्मा, डॉ. पुष्पा जमुआर, आरा से आयीं डॉ. रेणु मिश्र, विभा रानी श्रीवास्तव, सुजाता मिश्र, सुनीता रंजन आदि कवयित्रियों ने भी काव्य रचनाओं से श्रोताओं को भाव विभोर किया। संचालन संगठनमंत्री डॉ. शालिनी पांडेय ने किया। मौके पर सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ, वरिष्ठ कवि आचार्य विजय गुंजन, इंदु भूषण सहाय, कृष्ण रंजन सिंह आदि थे।

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