संस्कृत भाषा के विकास से ही संस्कृति समृद्ध होगी : सम्राट
उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि संस्कृत भाषा के विकास से हमारी संस्कृति समृद्ध होगी। राज्य सरकार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की समस्याओं के समाधान के लिए संकल्पित है। संस्कृत विद्यालयों के मॉडल बनाने और...

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि संस्कृत भाषा के विकास से ही हमारी संस्कृति समृद्ध होगी। संस्कृत सरल और सुगम है। संस्कृत से हमारी परंपरा अक्षुण्ण रहेगी। राज्य सरकार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के सभी समस्याओं के समाधान के लिए संकल्पित है। उन्होंने ये बातें मंगलवार को बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की वेबसाइट और पोर्टल के लोकार्पण के दौरान कहीं। रविन्द्र भवन में आयोजित संस्कृत दिवस समारोह की शुरुआत 25-25 शिक्षकों के सामूहिक स्वस्तिवाचन एवं शंखनाद से हुआ। कार्यक्रम में संस्कृत विद्यालयों को मॉडल बनाने, कम्यूटर शिक्षा और पाठ्यक्रम में बदलाव पर चर्चा हुई। इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा कि भाजपा और राज्य सरकार संस्कृत शिक्षा और संस्कृत विद्यालय के विकास की पुरजोर कोशिश करेगी।
जरूरत पड़ी तो चुनावी घोषणा पत्र में भी शामिल किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य के 45 चिह्नित संस्कृत विद्यालय मॉडल बनेंगे। संस्कृत में संस्कार, चेतना एवं ज्ञान का भंडार है। पाठ्यक्रम में रामायण एवं गीता जैसे महान ग्रंथों को जो समावेश किया गया है, इससे ज्ञान के अलावा छात्रों में संस्कार बढ़ेगी। शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ ने कहा कि सभी जिलों में एक-एक मॉडल संस्कृत विद्यालय होंगे। संस्कृत विद्यालयों में आधारभूत संरचना सुधार के लिए प्रयास किए जाएंगे। केएसडीएसयू के कुलपति प्रो.लक्ष्मीनिवास पाण्डेय ने कहा कि विद्यालयों में संस्कृतमय वातावरण करना चाहिए। अध्यक्षता करते हुए बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार झा ने कहा कि 27 वर्ष बाद संस्कृत विद्यालयों के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव किए जा रहे हैं। 26 जिलों का दौरा कर संस्कृत विद्यालयों की समस्या से अवगत हुआ। इन विद्यालयों में आधारभूत संरचना का अभाव, शिक्षकों के वेतन वृद्धि का अभाव आदि की समस्या दिखी। सरकार को समस्या से अवगत कराया गया है, उम्मीद है कि जल्द समाधान होगा। संशोधित पाठ्यक्रम भी विमोचित संस्कृत शिक्षा बोर्ड ने नूतन शिक्षा नीति-2020 पर आधारित कक्षा एक से 10 तक के संशोधित और संवर्धित पाठ्यक्रम का विमोचित किया गया। संस्कृत विद्यालयों के 14 प्रधानाध्यापक सम्मानित किए गए। कार्यक्रम में विधान पार्षद निवेदिता सिंह, डॉ. दुर्गेश कुमार राय, चन्द्रकिशोर कुमार, धनेश्वर कुशवाहा, अनुरंजन झा, अरुण कुमार झा, डॉ. रामप्रीत पासवान, निरंजन दीक्षित, आशीष कुमार झा, सचिव नीरज कुमार, परीक्षा नियंत्रक उपेंद्र कुमार, सुशील वर्मा, भवनाथ झा, आलोक कुमार आदि मौजूद रहे।
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