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गॉल ब्लाडर के कैंसर से बचने के लिए सबसे जरूरी है जागरूकता

गॉल ब्लाडर कैंसर एक अपेक्षाकृत दुर्लभ कैंसर है और अन्य कैंसरों की तुलना में...

गॉल ब्लाडर के कैंसर से बचने के लिए सबसे जरूरी है जागरूकता
हिन्दुस्तान टीम,पटनाThu, 29 Feb 2024 10:45 AM
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गॉल ब्लाडर कैंसर एक अपेक्षाकृत दुर्लभ कैंसर है और अन्य कैंसरों की तुलना में आम लोगों को इसके बारे में कम जागरूकता है। लोगों को गॉल ब्लाडर कैंसर के लक्षण और जोखिम के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है और यही इसके बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है। ऐसे में गॉल ब्लाडर के कैंसर के लक्षणों का पता लगते ही विशेषज्ञ डॉक्टरों से मिलना चाहिए और इसके फैलने से पहले उपचार शुरू कर देना चाहिए।
गॉल ब्लाडर कैंसर जागरूकता माह के अवसर ये बातें जाने-माने कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक आनंद ने कहीं। उन्होंने बताया कि बिहार में इन दिनों गॉल ब्लाडर कैंसर के मरीज काफी संख्या में मिल रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि गंगा के तटीय के लोगों में गॉल ब्लाडर कैंसर के मामले ज्यादा देखे जा रहे हैं।

क्या है गॉल ब्लाडर कैंसर :

गॉल ब्लाडर कैंसर पेट से संबंधित एक कैंसर है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें गॉल ब्लाडर में असामान्य कोशिकाएं तेज़ी से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का निर्माण करती हैं।

क्या हैं लक्षण :

पेट में दर्द, पेट में सूजन, भूख न लगना, वजन कम होना, मतली और उल्टी, थकान, पीलिया, मल का रंग हल्का होना और पेशाब का रंग गहरा होना गॉल ब्लाडर कैंसर के प्रमुख लक्षण हैं।

क्या है उपचार :

डॉ. आनंद के अनुसार सर्जरी गॉल ब्लाडर कैंसर के उपचार का सबसे आम तरीका है। सर्जरी में गॉल ब्लाडर को हटा दिया जाता है और कुछ मामलों में, आसपास के लिम्फ नोड्स को भी हटा दिया जाता है। इसके अलावा कीमोथेरेपी या रेडियाथेरेपी भी इसके उपचार में कारगर है। कीमोथेरेपी दवाओं का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को मारने का एक तरीका है वहीं रेडिएशन थेरेपी में उच्च ऊर्जा वाले एक्स-रे या प्रोटॉन का उपयोग करके कैंसर कोशिकाओं को मारा जाता है। टारगेटेड और इम्यूनोथेरेपी भी काफी कारगर साबित हुआ है। आजकल मॉलिक्युलर टेस्टिंग के द्वारा गॉल ब्लैडर कैंसर का सटीक इलाज किया जा रहा है।

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