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अगले साल जनवरी से अब शादी-ब्याह के बढ़िया मुहूर्त

15 जुलाई को शादी की शहनाइयां बजने के बाद चातुर्मास का शुभारंभ 23 जुलाई को हरिशयन एकादशी के बाद से हो जायेगा। धार्मिक मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान चार माह तक भगवान विष्णु शयन करते हैं। इस दौरान शादी-ब्याह, मुंडन, जनेऊ और नामकरण आदि वर्जित माने जाते हैं।

इस अवधि में धार्मिक अनुष्ठान अधिक होते हैं। वैसे सनातन धर्मावलंबियों के लिये इन्हीं चार माह के दौरान दशहरा, तीज, रक्षाबंधन आदि पर्व-त्योहार होते हैं। ज्योतिषाचार्य पीके युग ने पंचांगों के आधार पर बताया कि सनातन धर्मावलंबियों के लिये 15 जुलाई के बाद अब अगले साल 17 जनवरी से शादी-ब्याह के बढ़िया शुभ मुहूर्त हैं। आषाढ़ शुक्ल एकादशी (23 जुलाई ) से कार्तिक शुक्ल एकादशी (20 नवंबर) के कालखंड को चातुर्मास कहा जाता है। देवोत्थान एकादशी का इंतजारज्योतिषी युग के अनुसार इस वर्ष देवोत्थान एकादशी 20 नवंबर को है। हालांकि कार्तिक शुक्ल एकादशी के बाद आमतौर पर शादी-ब्याह के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाते हैं। पर इस वर्ष कार्तिक मास के बाद शादी-ब्याह के बढ़िया शुभ मुहूर्त नहीं बन रहे हैं। शादी-ब्याह के लिये शुक्र और गुरु का मजबूत होना बहुत जरूरी है। पर शुक्र के अस्त होने या गुरु के वक्री होने की स्थिति में शुभ लग्न नहीं होते हैं। 12 नवंबर से गुरु वृश्चिक राशि में अस्त रहेंगे और 7 दिसंबर को वृश्चिक में ही उदित होंगे। लेकिन त्रिबल वृद्धि के लिये 7 दिन का और समय लगता है। फिर 14 दिसंबर से खरमास शुरू हो जायेगा। खरमास में सनातन धर्मावलंबियों के शादी-ब्याह, मुंडन, जनेऊ आदि वर्जित रहते हैं। वहीं 4 दिसंबर से शुक्र स्वाति नक्षत्र में होंगे। यह राहू का नक्षत्र है। इससे त्रिबल की वृद्धि नहीं होती है। हालांकि विभिन्न पंचांगों में दिसंबर मास में 9, 10, 12 और 13 तारीख को शुभ विवाह मुहूर्त बताया गया है। जुलाई में केवल दो पंचांगों के अनुसार अगले साल 17 जनवरी 17 से 7 जुलाई तक शुभ विवाह के 59 शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। जनवरी से मार्च तक ही 21 शुभ मुहूर्त हैं। इसके बाद एक माह के अंतराल के बाद 16 अप्रैल से 28 जून तक 36 शुभ मुहूर्त हैं। जुलाई में केवल दो मुहूर्त हैं।श्रीहरि पाताल लोक में रहते हैं ज्योतिषाचार्य विपेन्द्र झा माधव ने बताया कि चातुर्मास के दौरान संत-महात्मा एक जगह से दूसरे जगह की यात्रा नहीं करते हैं। विष्णु पुराण के हवाले से बताया कि इन चार महीनों में श्रीहरि पाताल लोक में राजा बलि के यहां निवास करते हैं। चातुर्मास के देवता व संचालन कर्ता भगवान शिव होते हैं। बृहत संहिता के मुताबिक सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश के साथ चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है। राजा भी रखते थे व्रतज्योतिषाचार्य राजनाथ झा के मुताबिक हरिशयन एकादशी को पद्मा एकादशी भी कहा जाता है। इस एकादशी के व्रत से जीवन में आने वाले हर संकट खत्म हो जाते हैं। पद्मा एकादशी का संबंध पैदावार और बारिश से माना जाता है। इसलिए पुराने जमाने में राजा लोग पद्मा एकादशी का व्रत रखते थे।ये जरूरी हैंशादी के शुभ मुहूर्त के लिए वृष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु व मीन लग्न में से किसी एक का रहना जरूरी है। वहीं रेवती, रोहिणी, मृगशिरा, मूल, मघा, हस्त, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुन, उत्तरा भद्र, उत्तरा अषाड़ में एक नक्षत्र का रहना जरूरी है। सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त के लिए रोहिणी, मृगशिरा व हस्त नक्षत्र का रहना जरूरी है।

ये हैं शुभ मुहूर्त

जनवरी : 17, 18, 23, 25, 26, 29फरवरी : 1, 8, 9, 10, 15, 21, 23, 24, 26, 28मार्च : 2, 7, 8, 9, 13अप्रैल : 16, 17, 18, 19, 20, 22, 23, 24, 25, 26मई : 2, 6, 7, 8, 12, 14, 15, 17, 19, 21, 23, 28, 29जून : 8, 9, 10, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18,19, 25, 28जुलाई : 6, 7

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  • Web Title:auspicious time for marriages in hindu calendar next year