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आओ राजनीति करें: शिक्षा, सुरक्षा और आरक्षण से राजनीति में प्रखर होंगी महिलाएं

आओ राजनीति करें

लोकसभा चुनाव में पटखनी देने के लिए राजनीतिक दलों के बीच जोर आजमाइश जारी है। इसी बीच आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान ने आओ राजनीति करें, के तहत मुद्दों को टटोलना शुरू कर दिया है। 

अब नारी की बारी, विषय पर बुधवार को आयोजित संवाद में डॉक्टर, वकील, शिक्षिका, समाजसेवी, खिलाड़ी और गृहणियों ने मुखर होकर अपनी बातें रखी। संवाद में महिला वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि अगर महिलाओं को शिक्षा, सुरक्षा और आरक्षण मिले तो राजनीति में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी होगी। अब महिलाओं को नीति निर्धारण में भागीदारी मिलनी चाहिए। राजनीति में महिलाओं को आगे आना होगा। चाहे आरक्षण की बदौलत आएं या फिर लड़कर अपनी हिस्सेदारी लें। वक्ताओं ने कहा कि इसके लिए ग्रामीण परिवेश की महिलाओं के बीच जागरूकता की जरूरत है। पढ़ी-लिखी महिलाओं को चाहिए कि टोली बनाकर आम महिलाओं के मुद्दे को पहचानें और उन्हें उसके समाधान के प्रति जागरूक करें। 

महिला प्रतिनिधियों को भी चाहिए कि वे खुद ही सारा काम करें। अपने पति, पुत्र या प्रतिनिधि के भरोसे न छोड़ें। तभी राजनीति में महिलाएं पिछलग्गू की भूमिका से निकलकर आगे की पंक्ति में खड़ी होंगी। 

नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी, तभी राजनीति में महिलाएं सशक्त होंगी। पितृसत्तात्मक समाज को छोड़कर अपनी पहचान बनाने की तरफ महिलाओं को अग्रसर होना होगा। 
शाहीना परवीन, समाजसेवी

संसद में जबतक महिलाएं चुनकर नहीं आएंगी। महिलाओं की सशक्तीकरण की बात पुरुष के भरोसे सोचना बेईमानी होगी। इसके लिए जरूरी है कि महिलाओं को संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण मिले। 
अलका वर्मा : अधिवक्ता, हाईकोर्ट

महिलाओं के संबंध में बचपन से ही राजनीति शुरू हो जाती है। इसके बावजूद महिलाएं हर मोड़ पर खुद को साबित करती हैं। इस वजह से महिलाओं को राजनीति में बराबरी का हक देने से नीति निर्धारक डरते हैं। 
माला सिन्हा, पार्षद

पंचायतों में 50 प्रतिशत महिलाएं चुनकर आयी हैं। लेकिन उनके काम पति करते हैं। अगर महिलाएं चाह ले कि सारा काम वही करेंगी तो पति कुछ नहीं कर सकता है। महिलाओं को अपने अधिकार समझने होंगे। 
विशाखा, समाजसेवी

बिना किसी मैनेजमेंट की पढ़ाई के जब महिलाएं घर चला सकती हैं तो एक पढ़ी-लिखी महिला देश क्यों नहीं चला सकती है। जिस दिन महिला सोच लेगी कि उसका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता है। उस दिन से कुछ भी कठिन नहीं होगा।
दीप्ति लेखा राय, महिला किसान

हम सालभर एक गृहणी होती हैं और एक दिन पहले हमें राजनीतिज्ञ बना दिया जाता है। इसके लिए महिलाओं को जागरूक होने की जरूरत है। अगर एक महिला जागरूक और शिक्षित है तो आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता है। 
डॉ स्मृति स्पर्श, स्त्री रोग विशेषज्ञ

महिलाएं जब तक जानकार नहीं होंगी, तब तक अपने और समाज के लिए काम नहीं कर पाएंगी। अगर हम जानकार हैं तो दूसरी महिलाओं के लिए भी लड़ सकेंगी। क्योंकि जानकारी के अभाव में महिलाएं घर में रहने को मजबूर होती हैं। 
- श्रुति सिंह, वकील

जो महिलाएं राजनीति में जाना चाहती हैं। उन्हें संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण मिलना ही चाहिए। क्योंकि महिलाएं सदियों से शोषण का शिकार रही हैं। उन्हें शिक्षा और स्वास्थ्य से वंचित रखा गया है। 
डॉक्टर प्रज्ञा मिश्रा, स्त्री रोग विशेषज्ञ 

देश की 90 प्रतिशत महिलाएं रोजीरोटी के लिए हर दिन लड़ती है। ऐसी स्थिति में संसद में कई सालों से 33 प्रतिशत आरक्षण बिल फंसा होना विडंबना से कम नहीं है। 
- रामपरी, एडवा, राज्याध्यक्ष

महिलाओं को मौका मिले तो खुद को साबित कर सकती हैं। कभी-कभी शिक्षा के अभाव में अपने अधिकार का उपयोग नहीं कर पाती हैं। आज जरूरत है कि महिलाएं अधिकार के साथ अपने फर्ज के प्रति जागरूक हों। 
- डॉ निक्की हेमब्रम, सदस्य, बिहार राज्य महिला आयोग

महिला हो या पुरुष जो भी मेहनत करता है आगे बढ़ता है। पुरुषों को यह डर होता है कि अगर महिलाएं राजनीति में आएंगी तो उनसे अच्छा मुकाम बना लेंगी। इस वजह से राजनीतिक दल महिलाओं को चुनाव लड़ने का मौका नहीं देते हैं। 
- मधु, फुटबॉलर

राजधानी की सड़कों पर महिलाएं ऑटो चला रही हैं। इसके बावजूद लोग उन्हें ऐसी नजर से देखते हैं मानों कोई अजूबा हो। हर जगह महिलाओं की भागीदारी बढ़े। इसके लिए हमें अपनी मानसिकता बदलनी होगी।
- दीपारानी खान, पार्षद, वार्ड नम्बर 05

इन मुद्दों पर महिलाओं ने आवाज बुलंद की
- शिक्षा, सुरक्षा और आरक्षण मिले
- जागरूकता के साथ अपने अधिकार को जानें महिलाएं
- नीति निर्धारण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए
- संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण बिल के लिए आंदोलन को तेज करना होगा
- महिलाओं के साथ पुरुषों में सामाजिक शिक्षा की है जरूरत
- सम्मान नहीं बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए
- अवसर मिले तो अच्छी राजनीतिज्ञ बन सकती हैं महिलाएं
- पड़ोसी देशों से सीख लेकर महिलाओं को मिले राजनीति में भागीदारी का मौका
- महिलाएं अपने अधिकारों के लिए खुद लड़ें और जनता की सेवा करें
- तय हो शैक्षणिक योग्यता, बने पॉलिटिकल यूनिवर्सिटी 
- अपने साथ चार महिलाओं को करें सशक्त फिर बनेगा शक्तिशाली समाज
- शिक्षा,बराबरी के साथ मिले आजादी तो राजनीति में होगी सुनिश्चित भागीदारी
- सोचने की स्वतंत्रता मिले, तभी राजनीति में महिलाओं को भागीदारी मिलेगी
- खुद पर दृढ़ निश्चय करना होगा,  बिना शिक्षा राजनीति नहीं 
- महिलाओं को राजनीति के लिए तैयार होने की जरूरत है 

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  • Web Title:aao rajneeti karein Women will be intensified in politics by education security and reservation