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आओ राजनीति करें: महिलाओं को मिले राजनीति में समान भागीदारी

‘हिन्दुस्तान’ पटना की ओर से पटना साइंस कॉलेज में आयोजित संवाद में छात्राओं ने उत्साह से भाग लिया।

लोकसभा चुनाव निकट है। ऐसे में मतदाताओं को जागरूक करने और लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से बुधवार को हिन्दुस्तान की ओर से पटना साइंस कॉलेज में संवाद आयोजित किया गया। आओ राजनीति करें अभियान के तहत हिन्दुस्तान इन कैंपस में कॉलेज के प्राचार्य, शिक्षक और छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इसदौरान कहा गया कि लड़का अगर दस बजे रात में कॉन्फ्रेंस में होता है तो अभिभावक निश्चिंत रहते हैं कि आ जाएगा लेकिन लड़कियों के लिए शाम सात बजे से ही परेशान होने लगते हैं। लड़कियां भी चाय की दुकानों पर देश-दुनिया की बातें कर सकती हैं अगर वे वहां सुरक्षित महसूस करें तो। 

राजनीति का नाम आते ही हमारे दिमाग में घोटाले, भ्रष्टाचार, घपले ही हैं। ऐसे में हमारा वहां जाना क्या, वहां जाने की सोचना भी संभव नहीं है... सुरक्षा मिले तो पैरेंट खुद भयमुक्त होकर हमें राजनीति में जाने से नहीं रोकेंगे। छात्राओं ने जहां अपनी सुरक्षा और भागीदारी की मांग रखी वहीं महिलाओं के राजनीति में समान भागीदारी पर सहमति जताई। आर्थिक, धार्मिक क्षेत्रों में स्वतंत्रता के साथ उन्होंने राजनीतिक समानता की बात पर भी बल दिया। आयोजन में कॉलेज के बर्शर डॉ संजय कुमार की अहम भूमिका रही।

भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी जब तक नहीं बढ़ेगी, उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा। शिक्षा के जरिये महिलाओं को सशक्त किया जा सकता है। सशक्त महिला ही अपने अधिकार और कर्तव्य को लेकर जागरूक रहेंगी। 
-रेशमा खातून, छात्रा, केमेस्ट्री विभाग

महिलाओं की लोकतंत्र में भागीदारी बढ़ाने को लेकर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हुआ था। इसमें यह बात सामने आई कि संसदीय सीटों पर आरक्षण के जरिये उनकी भागीदारी बढ़ाई जा सकती है। हमारी राजनीतिक प्रणाली को महिलाओं के अनुकूल बनाये जाने की जरूरत है। 
-जूली शर्मा, छात्रा, केमेस्ट्री विभाग

समाज की बेहतरी में पुरुषों के समान महिलाओं को भी अधिकार मिलना चाहिए। आज महिलाएं मुखिया और सरपंच बन जाती हैं लेकिन उनके काम उनके पति और भाई करते हैं। कठपुतली बनने से इतर महिलाओं को शिक्षित होकर लोगों के हित में फैसले लेने होंगे।    
-विद्या, बायोटेक्नोलॉजी

महिलाओं को घर की जिम्मेदारी संभालने तक की सोच के दायरे से बाहर निकालने की जरूरत है। जेंडर इक्वालिटी पर ध्यान देना होगा। सशक्त लोकतंत्र के लिए आधी आबादी की भागीदारी का प्रतिशत बढ़ाये जाने की जरूरत है। 
-सौम्या सिन्हा, जूलॉजी

सब रूढ़िवादी सोच का परिणाम है। अधिकतर महिलाएं सोचती हैं कि राजनीति तो हमारे लिये है ही नहीं। इस सोच से बाहर निकल महिलाओं को सशक्त होना होगा। सशक्त महिला सशक्त वोटर होगी और लोकतंत्र में अधिक भागीदारी बन सकेंगी। 
-अंकिता कुमारी, जूलॉजी

अधिकारों के लिए लड़ना पड़ता है। महिलाओं को भी अपने हक की लड़ाई के लिए आगे आने की जरूरत है। यह ट्रेंड देखा गया है कि जहां महिला उम्मीदवार चुनावी मैदान में होती हैं वहां महिला वोटरों की प्रतिशतता भी बढ़ती है। 
-प्रो. रणधीर कुमार, केमेस्ट्री विभाग

चेतना को जागृत करने का समय है। हम जिस परिवेश में हैं, आसपास की महिलाओं को सशक्त करें। लोकतंत्र में देवत्व और पवित्रता के लिए महिलाओं को आगे आने की जरूरत है। शिक्षित महिलाओं को इस क्षेत्र में आगे आने की जरूरत है।
-प्रो.ज्ञानेंद्र नाथ, केमेस्ट्री विभाग

हिन्दुस्तान की यह पहल सराहनीय है। संसदीय प्रणाली में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए महिलाओं को आगे आना होगा। महिला की समस्याओं के समाधान के लिए महिला जनप्रतिनिधि विशेष काम कर सकेंगी। 
-प्रो. रजनीश कुमार, केमेस्ट्री विभाग

राजनीति का नाम सुनते ही घोटाला और भ्रष्टाचार दिमाग में सबसे पहले आता है। लोग अपनी छवि बचाने के लिए कहते हैं कि मैं राजनीतिक पार्टी से नहीं हूं। इसलिए सबसे पहले राजनीति को ऐसे लोगों की जरूरत है जो इसकी छवि सुधार सकें। महिलाएं इसके लिए बेहतरीन उम्मीदवार हो सकती हैं। 
-आयशा, जूलॉजी

जागरूकता,शिक्षा और पारिवारिक सहयोग मिले तो हमलोग भी इस क्षेत्र में जोर-आजमाइश कर सकते हैं ताकि समाज को बेहतर बनाने में हम अपनी भागीदारी निभा पाएं। आज राजनीति पैसा कमाने का जरिया बन गई है। इसलिए इसकी पहुंच बड़े-बड़े नेताओं के हाथ में है। 
-शिवानी यादव, जूलॉजी

हमेशा हमसे सवाल किए जाते हैं कि महिलाएं क्यों नहीं राजनीति में आती हैं। हम समस्याएं बताते हैं लेकिन हमारी बात सही जगह पहुंच नहीं पाती। हमारी बहुत सी समस्याएं हैं लेकिन क्या कोई ऐसा है जो इसे सरकार तक पहुंचा पाए? नहीं है... इसलिए हमें महिला प्रतिनिधि की जरूरत है। 
-जया राज,जूलॉजी

समय बदल रहा है। एक समय वोट देने के लिए भी काफी कम संख्या में महिलाएं बाहर निकलती थीं। जो बूथों तक जाती भी थी वे घूंघट में जाती थी। हालिया सालों में जागरूकता आई है। महिला वोटों का   प्रतिशत बढ़ा है लेकिन अब भी इसका   औसत कम है। महिलाओं का प्रतिनिधित्व लोकतंत्र में जितना बढ़ता जाएगा, वोटों की प्रतिशतता उतनी ही बढ़ती जाएगी। सभी छात्राएं लोकतंत्र के महापर्व में बढ़-चढ़कर भाग लें और राजनीति में जाने को इच्छुक महिलाओं को प्रोत्साहित करें। 
-प्रो. राधाकांत प्रसाद, प्राचार्य, पटना साइंस कॉलेज 

महिलाओं को राजनीति में समान भागीदारी मिलनी चाहिए। वह संवेदनशील व सहनशील होती हैं, जिसके कारण वह हर तरह के मसलों पर सही निर्णय लेने में मदद करेंगी। गुंडागर्दी व भ्रष्टाचार के माहौल से भी उन्हें इस क्षेत्र में नहीं आने दिया जाता। -शाइस्ता नाज

इतिहास गवाह है कि हमारी नेत्रियों ने कमाल का राजनीतिक नेतृत्व किया है। रजिया सुल्तान, झांसी की रानी, भिखाजी कामा जैसी महिलाओं से प्रेरणा लेनी चाहिए। दिल-दिमाग के सही संतुलन से उनके फैसले सही साबित होते हैं। कैबिनेट में अगर महिलाएं होंगी तो बेहतर निर्णय लिये जा सकेंगे। -रिचा ठाकुर, जूलॉजी

महिलाएं बहुत हद तक आगे बढ़ रही हैं लेकिन आज भी गांव में उन्हें पढ़ने के लिए रोका जाता है। धार्मिक क्षेत्रों में उन्हें सीमित अधिकार दिए जाते हैं। सबरीमाला मंदिर इसका ताजा उदाहरण है। राजनीति की छवि आज भी अच्छी नहीं है, जिसके कारण महिलाएं इसमें आना नहीं चाहती हैं। 
-दीक्षा भानू, जूलॉजी

पितृसत्तात्मक समाज किसी भी क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकता है। उनके लिए लक्ष्मण रेखा खींच दी गई हैं लेकिन इन बेड़ियों से लड़कियां आगे निकल रही हैं। इसके लिए उन्हें शिक्षित होना होगा व अधिकारों को छीनना होगा। वह शिक्षित होंगी तो दो परिवारों को शिक्षित करेंगी।     
-सुलेमा सबरीन, केमिस्ट्री 

राजनीति अब पावर व रूल करने का जरिया बन गया है। इसलिए इसकी पहुंच अब सीमित लोगों तक ही है अगर हमारे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए तो लोगों की रुचि बढ़ेगी। सिलेबस ऐसे डिजाइन किए जाएं कि लोग राजनीति को रोचकता से पढ़ें और जानें तो इसमें महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। 
-स्मिता, केमिस्ट्री 

इस क्षेत्र में ही क्यों, हर क्षेत्र में महिलाएं कम हैं लेकिन राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से हमारे देश का विकास हो पाएगा। इसके दो कारण हैं-सुरक्षा की कमी और परिवार से सपोर्ट नहीं मिलना। जैसे ही सुरक्षा के लिए वह निश्चिंत होंगी,घर से भी सपोर्ट मिलना शुरू हो जाएगा।     
-नित्या, जूलॉजी

महिलाओं को कमजोर आंकने वाले लोग की मानसिकता कमजोर है। ऐसे लोगों को अपना नजरिया बदलना होगा क्योंकि उनकी इस सोच के कारण ही महिलाएं घर से बाहर नहीं निकल पाती हैं। महिलाओं को भी अपने प्रति जागरूक होना होगा तभी वह आगे निकल पाएंगी।     
-दिव्या सिंह, जूलॉजी

महिलाएं शिक्षित होंगी तो खुद आगे आएंगी, इसलिए उन्हें पहले शिक्षित करना जरूरी है। बैठे-बैठे मानसिकता नहीं बदल सकती, इसलिए उन्हें जागरूक भी करना होगा। उनके राजनीति में आने से फैसले में विविधता आएगी और वह आधी आबादी की बात मुखरता से रख पाएंगी।     
-पूजा झा, केमिस्ट्री

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