सीआईएमपी :बिहार में सीएसआर की नई राह तलाशने को सम्मेलन में जुटे विशेषज्ञ

Dec 10, 2025 10:03 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, पटना
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चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान पटना ने यूनिसेफ और हैदराबाद विश्वविद्यालय के सहयोग से सामाजिक उत्तरदायित्व पर पांचवां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। इसमें नीति निर्माताओं और शिक्षाविदों ने बिहार में सीएसआर की नई दिशा पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने पारदर्शिता, स्वतंत्र मूल्यांकन और बुनियादी अधिकारों को सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

सीआईएमपी :बिहार में सीएसआर की नई राह तलाशने को सम्मेलन में जुटे विशेषज्ञ

चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान पटना (सीआईएमपी) के सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) एवं ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) अध्ययन केंद्र ने यूनिसेफ और हैदराबाद विश्वविद्यालय के सहयोग से सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पर बुधवार को पांचवां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। इसमें नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों, कॉरपोरेट जगत से जुड़े लोगों बिहार में सीएसआर की नई राह तलाशने को लेकर विभिन्न नीतियों और तरीके पर चर्चा की। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर राणा सिंह ने कहा कि सीएसआर को केवल चेकबुक पर परोपकार से आगे बढ़कर परिणाम केन्द्रित हस्तक्षेप करना होगा। मुख्य वक्ता डॉ. इंद्रनील डे, एक्सिस बैंक चेयर प्रोफेसर ने कहा कि सीएसआर सार्वजनिक कल्याण का एक महत्वपूर्ण जरिया है और इसमें पारदर्शिता तथा स्वतंत्र मूल्यांकन जरूरी है।

यूनिसेफ की प्रतिनिधि मार्गरेट ग्वाडा ने बिहार को बच्चों के लिए नवाचार का मॉडल राज्य बनाने की बात कही। डॉ. हिश्मी जमील हुसैन ने बुनियादी अधिकारों को सुनिश्चित करने में सीएसआर की भूमिका पर बल दिया। नाबार्ड के लक्ष्मण कुमार ने सीएसआर आवंटन की असमानता को सुधारने की आवश्यकता पर बल दिया। नीति विशेषज्ञ मैथ्यू चेरीयन ने बताया कि बिहार को राष्ट्रीय सीएसआर निधि का मात्र एक प्रतिशत ही मिलता है। विशेष संबोधन में डॉ. भास्कर चटर्जी ने इसे अहिंसक क्रांति बताते हुए कहा कि वर्तमान में 28,000 कंपनियां लगभग 35,000 करोड़ रुपये योगदान करती है, जो 2035 तक एक लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।कार्यक्रम में बिहार की नई सीएसआर नीति पर 15 से अधिक शोध पत्रों की प्रस्तुति भी हुई।

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