10th and 12th CBSE board evaluation of copy sent to peon - लापरवाही: चपरासी को भेज दिया कॉपी मूल्यांकन करने DA Image

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लापरवाही: चपरासी को भेज दिया कॉपी मूल्यांकन करने

सीबीएसई की परीक्षा प्रणाली और मूल्यांकन की पारदर्शिता शुरू से अनुकरणीय रही है। बोर्ड की ओर से और बेहतर करने के प्रयास भी लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन सारी कोशिशों पर जब स्कूल वालों की लापरवाही पानी फेर तो क्या किया जा सकता है। 

ताजा मामला 10वीं और 12वीं बोर्ड के कॉपी मूल्यांकन का है। बोर्ड ने योग्य अनुभवी शिक्षकों को इस काम में लगाने का निर्देश दिया था, पर कई स्कूलों ने चतुर्थ वर्गीय कर्मी को तो कई ने प्राइमरी शिक्षकों को 10वीं और 12वीं बोर्ड के मूल्यांकन के लिए भेज दिया। अब जब कई मूल्यांकन केंद्रों पर ऐसे परीक्षकों का पता चला तो इन स्कूलों की पोल सीबीएसई के पास खुली है। 

ज्ञात हो कि 2018 के बोर्ड रिजल्ट के बाद गलत मूल्यांकन के कारण कई छात्रों को नुकसान हुआ। इसके बाद सीबीएसई ने देशभर के 150 शिक्षकों पर कार्रवाई की थी। इसमें बिहार से 50 के लगभग शिक्षक थे। शिक्षकों ने एवरेज मार्किंग कर दिया था। जब छात्रों ने स्क्रूटनी के लिए आवेदन दिया तो सही चीजें सामने आयी थीं। सीबीएसई 10वीं और 12वीं के अधिकतर केंद्रों पर अनुभवहीन और बिना योग्यता के शिक्षक पकड़े गये। इनमें अधिकतर शिक्षक बिहार के छोटे शहर और पटना के आसपास के स्कूलों के थे। नाम नही बताने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि गलत कॉपी जांच में संबंधित मूल्यांकन केंद्र को शोकॉज किया जायेगा। इस कारण पूरी जांच के बाद मूल्यांकन करवाया गया। 

बिना अनुभव और योग्यता भरे भेज दी स्कूलों ने सूची  
सीबीएससई सूत्रों की मानें तो बिहार के कई स्कूलों ने जो शिक्षकों की सूची भेजी, उसमें केवल शिक्षकों का नाम ही भेजा। स्कूलों ने न तो शिक्षकों का अनुभव दिया और न ही योग्यता ही लिखी। जब ये शिक्षक मूल्यांकन के लिए पहुंचे तो ऐसे शिक्षकों की पोल खुली।  जिन शिक्षकों पर शक हुआ, उनका केंद्राधीक्षक ने टेस्ट भी लिया। इसको लेकर सीबीएसई पहले ही निर्देश दिया था। पटना के कई केंद्रों पर टेस्ट के दौरान शिक्षक पकड़ में आए। इनकी गलत योग्यता देकर मूल्यांकन के लिए भेजा गया था। 

स्कूलों पर होगी कार्रवाई 
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा समिति के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने बताया कि देशभर के कई मूल्यांकन केंद्रों से इसकी जानकारी मिली है। जिन स्कूलों ने गलत शिक्षकों का नाम भेजा है, ऐसे स्कूलों पर कार्रवाई की जायेगी, क्योंकि स्कूलों को पहले ही ट्रेंड और अनुभव वाले शिक्षकों का नाम भेजने को कहा गया था। 

केस-1
डीएवी में 12वीं की कॉपी जांच को आए एक परीक्षक से जब पूछा गया तो पता चला कि वे जिस स्कूल से आए हैं, वहां पर चतुर्थ वर्गीय कर्मी के रूप में कार्यरत है। जानकारी मिलने के बाद स्कूल प्रशासन ने मूल्यांकन नहीं करवाया। 

केस-2
लोयला हाई स्कूल में 12वीं के लिए मूल्यांकन करने आये शिक्षक से जब 12वीं में पढ़ाई जाने वाली किताबों के नाम पूछे गए तो शिक्षक एक भी नाम नहीं बता पाए। जब और पूछताछ की गयी तो पता चला कि वे आठवीं तक के शिक्षक हैं। 

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  • Web Title:10th and 12th CBSE board evaluation of copy sent to peon

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